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भारत की जनता को युवा सांसदो को अपनी पारी पर कोई उपलब्धि दर्ज नही करा पाये , बेवदुनिया की रिपोर्ट

संसद में अपनी बुलंद आवाज के जरिये दमदार मौजूदगी का एहसास कराने वाले नामचीन नेताओं के सपूतों का संसद में प्रवेश भले ही शानदार तरीके से हुआ हो, लेकिन पिछले चार साल में इनकी मौजूदगी फीकी ही रही।

कांग्रेस में नेहरू गाँधी परिवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी राहुल गाँधी, स्वर्गीय राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, नवीन जिंदल, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, दुष्यंतसिंह और मानवेंद्रसिंह जैसे युवा सांसदों की पहली पारी का आगाज जनता की तमाम उम्मीदों के साथ हुआ था। लेकिन पिछले चार साल में जो नतीजा सामने आया उसे सिफर ही कहा जा सकता है।

समाचार पत्रिका आउटलुक के पहले मासिक संस्करण में संसदीय दस्तावेजों के हवाले से इन युवा नेताओं की पहली पारी का रिकॉर्ड पेश किया गया है।

इसके मुताबिक राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंतसिंह, मिलिंद देवड़ा और नवीन जिंदल के अलावा किसी भी युवा सांसद की संदन में मौजूदगी और उठाए गए सवालों का ब्यौरा जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने लायक कतई नहीं कहा जा सकता।

संसद में 14वीं लोकसभा के आँकड़े बताते हैं कि कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी ने अब तक आहूत 14 सत्रों में आयोजित 296 बैठकों में केवल चार बार अपनी राय रखी और सिर्फ तीन सवाल पूछे। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री जसवंतसिंह के लाड़ले मानवेंद्रसिंह ने तो इस दिशा में राहुल बाबा को भी पछाड़ दिया।

उन्होंने तो संसद में अब तक एक भी सवाल पूछने की जहमत उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। इतना जरूर रहा कि उन्होंने 296 बैठकों में आठ बार बोल कर संसद में अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराई।

संसद में अपने क्षेत्र की समस्याएँ उठाने के मामले में सांसद संदीप दीक्षित का रिकॉर्ड कमोबेश बेहतर कहा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में बिजली, पानी और सीलिंग सहित अन्य समस्याओं पर 40 बार अपनी राय पेश की।

इसके अलावा राजस्थान के दौसा से सांसद जूनियर पायलट ने पिछले चार साल में 16 बार क्षेत्रीय समस्याओं को संसद में उठाया। इस दौरान उन्होंने किसानों और गुर्जर समुदाय की समस्याओं के अलावा एक बार परमाणु करार पर भी अपने विचार रखे लेकिन किसी मंत्री से अपने क्षेत्र या राज्य के बारे में सिर्फ एक बार सवाल पूछना जरूरी समझा।

इसके विपरीत राजस्थान के राजघराने से ताल्लुक रखने वाले दुष्यंतसिंह ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी संसद में बोलने का कोई मौका नहीं गँवाया। दुष्यंत ने 52 बार न सिर्फ अपने विचार रखे, बल्कि 590 सवाल दागकर संसद में दमदार तरीके से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

इसी प्रकार पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद देवड़ा ने भी संसद की 15 बैठकों में न सिर्फ अपनी बात रखी बल्कि 460 बार मंत्रियों से अपने क्षेत्र के बारे में सवाल भी पूछे। उन्होंने मुंबई के नवीनीकरण के लिए 800 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की माँग की, एक बार बजट की बहस में भी शामिल हुए और परमाणु करार पर भी अपना मत व्यक्त किया।

कांग्रेस के दिग्गज दिवंगत नेता जितेन्द्र प्रसाद के पुत्र और शाहजहांपुर से सांसद जतिन प्रसाद केन्द्र सरकार में मंत्री जरूर बन गए, लेकिन उनकी इस कामयाबी का श्रेय संसद में उनके प्रतिनिधित्व को कतई नहीं दिया जा सकता। उनका अब तक का रिकॉर्ड तो यही बताता है कि उन्होंने कुल छह बैठकों में भाषण दिया और छह ही सवाल पूछे।

इस प्रकार दिग्गज नेताओं के राजनीतिक उत्तराधिकारियों का पहला रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। अभी भी युवा सांसदों के बचे हुए कार्यकाल में इन्हें अपनी दूसरी पारी के लिए गंभीरता से सोचने की जरूरत है जिससे कि जनता इन पर दोबारा विश्वास कर अपना प्रतिनिधित्व करने का मौका देने की हिम्मत जुटा सके।

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