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मनमोहनजी ने महगाँई पर रोना रोया |
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देश मे 21,000 करोड रुपये और खर्च करने के लिये जहाँ उपलब्ध होगे जो पानी की तरह बहाये जायेगे क्यो कि वो मेहनत की कमाई का नही , सरकारी आदमी को काम ही क्या केवल सरकारी कुर्सीया तोडने के सिबाय , जो आम आदमी या निजी कर्मचारी काम करता है ,वो सरकारी दमाद क्या खाक कर पायेगा तो सरकारी पैसा दुसरो को रुतबा दिखाने के लिये खर्च केरगा या अपने शौक के लये हम गरीबो का क्या फयादा हुआ , राम जाने
लाल किले से मनमोहने सिहं ने जो कहाँ वो तो किसी ने सुना हो कि नही पर सबके सबके मुसकुरा रहे थे कि अगली बार कौन होगा , वो न जाने कोन सी कुर्बानी देश की जनता से माँगेगा |