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मत विभाजन की धुल छटने लगी , आगे की सोच नीति लागु |
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जो जो मत विभाजन के समय हुया सभी सांसदजी जो हारे इसको काला दिन कह रहे पर अब जब सरकार के सपा द्बारा पाँव भारी हो कर दिये गये जिससे बेवक्त की चुनावी अटकले खत्म हो गयी , अब सब अपने मौहरे फिर से जमाने लगे है करात महाशय दादा को वापस
अजीतसिहं से मुलाकात, माया को नीद से जगा रहे कि आप के पहले हम है प्रधानमंत्री पद के दावेदार, सवाल दो टके का है कि हम अपनी लोकसभा मे स्थिति कैसे मजबुत करे , जिससे ज्यादा से ज्यादा फायदा कैसे ले , सपा की रणनीति सब को पंसद आ रही , सबको मालुम है कि दोनो राष्टीय स्थर की पार्टी अकले सरकार नही बना सकती सो, अब सबका ध्यान नम्बर पर है , सो सभी आगे की सोच नीति पर चल रहे वैसे भी राजनीति मे कोई दोस्त दुशमन नही होता , सोमनाँथ दादा को जो की सबसे साफ सुधरे सांसदजी माने जाते है माकपा उनकी सीट आने वाले चुनाव मे खोना नही चाहती सो करात महोदय दादा की वापसी पर फिक्कमंद नजर आ रहे है . दादा के साथ कोई विवाद किसी भी सांसदजी से हो नही सकता । माकपा की उनके रहने से शान बढ़ेगी ही ,करात युवा सांसदजी है विंदाजी तेज है पर दादा की जरुरत सबसे ज्यादा इनही को है |