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राजा हो या रंग ,सब के सब दो जुन की रोटी ही खाते है . कोई माखन से कोई , कोई नमक से , जिन्दगी गुजारने के लिये कोई मकसद भी जरुती है दुनिया मे अधिकाँश अपने परिवार को हि अपना प्रथम मकसद बनाते . ताजिन्दगी मे मकसद बदलते रहते है ,
बचपन मै पढ़ना, युवा मे जनुन होता कुछ कर गुजरने का . बाद मे पारिवारिक जिम्दारियाँ मजबुत आदमी को भी मकसद से दुर कर देती . भारत मे , पारिवार का सही सही पोषण करते करते सारी जिन्दगी निकल जाती . दीन दुनियाँ की खबरे परिवार के बाद आती जो थोडा बहुत समय बचता हे बो रिशतेदारो की देना पडते है समाज और देश जब आता है जब कोई ईनकी आस्मिता से खिडबाड करता है , जब सारा का सारा भारत एक सुर मे देश समाज के साथ हो जाते . मनमोहन सरकार के नये नुमाईदे अमरसिहं ने जो सांसद होने के नाते जो कुछ किया इससे उनकी तो सरकार मे अच्छी बन गयी पर सांसदजी ने अपनी किरकिरी कराई है उनके बारे मे भाई जनता क्या कह रही उन्हे क्या मतलब अमरसिहं तो अमर होगये आने वाली सरकारे मी सांसदजी की सेवा लेती रहेगी , मन + मोहन न सही कोई और को तो जरुरत पडेगी ? अमरसिहं जिन्दाबाद . |