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मनमोहन सरकार के तारन हार सांसदजी को जिल्लत की जिन्दगी मिल सकती है |
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अपने पैरो पर कुलाडी मारना या कुल्लाडी पर पैर मारना ,.शायद सांसदजीओ ने सोचा नही होगा की वो जो कर रहे है वो उन्हे जिल्लत की जिन्दगी जिने पर मजबुर कर देगा. सांसदजी की तो ठीक है वो कंलक उन्के परिवार एंव साथी नात रिशतेदार , न जाने कौन कौन . को
धोते धोते न जाने कितनी जिन्दगीयाँ लग जाये .आखिर गद्दारी गद्दरी होती पार्टी से हो .देश हो., आम जनता से हो . माफ करना जरा मुसकिल होता है भाजपा हो या अन्य दल के सांसदजी हो , जिन्होने सरकार बचाने मे अपनी संदिग्ध भुमिका का परिचय दिया है . उन्हे ता जिन्दगी अपनी पार्टी से निकाल दिया है अगर पार्टी उन्हे माफ कर भी दे पर जनता जिससे पास खोने के लिये कुछ नही होता सिबाय ईज्जत के बो कभी माफ नही करेगी, माफ करना भी नही चाहिये . |