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जिससे लोग प्यार से सांसदजी कहते है |
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लोकतत्र देशो मे भारत का जबाब नही या हर सासदजी की सही पहचान होती , सासद लगभग भारत मे १० मिलियन मतदाता के समुह से चुन कर आता है , जो कई देशो की जनसंख्या है , सांसदजी मे कोई बहुत इमानदार है , बाहुबली, न जाने क्या क्या है पर है अपने लोकसभा का सांसद , जिससे लोग प्यार से सांसदजी कहते है
वो रहे कही भी चाहे जेल मे दिल्ली मे या विदेश मे . पर समय समय पर मतदाओ की सुनते है दरबार लगाते है न जाने क्या क्या करते है भारत का मतदारा , होशियार,बेबाकुफ . पढा लिखा, गमार , सभी है तो जो भी हो चाहे . सोनियाजी , आडवानीजी , मनमोहन जी . सभी अपनी अपनी लोकसभा का ध्यान रखते है , इसलिये तो दुबारा जनता मौका देती है , अब नम्बरो का खेल चल रहा है ,मतदाता को कोई मतलब नही रहा है जब खेल बिगड जायेगा तो लोकतंत्र का स्वामी सबको याद आयेगा . जो की मतदाता ही है . अमरसिहं तो कभी चुनाव लडे नही सो उनकी कोई दिक्कत नही. पर दुसरो की सोचो . . भारत एक लोकतात्रकी देश है बहुमत होना ही सरकार है . बाकी सब बेकार है . अब नबंर की बात बहुमत के लिये 545 नबर होना . सीटों में से दो रिक्त हैं. यूपीए सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 543 में से 272 सांसदों का समर्थन पाना होगा. सरकार गिराना हो तो भाजपा को भी इतनी चाहिये. परमाणु विस्फोट कितने पर होता है वो २२ को ???????? |