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प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी पहली पसंद |
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अगर आम चुनाव वर्तमान में कराए जाएँ तो संप्रग 33 फीसदी मत आधार के साथ लोकसभा में 183 से 193 सीटों पर जीत दर्ज करेगी, जबकि प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी मतदाताओं की पहली पसंद हैं। 'द वीक' के लिए किए गए जनमत सर्वेक्षण में यह बात कही गई है।
इस सर्वेक्षण में कहा गया कि विपक्षी राजग को 32 फीसदी मतों की हिस्सेदारी के साथ 179 से 189 सीटें मिलेंगी। संप्रग सरकार से वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बाद नौ और दस जुलाई को किए गए किए गए इस जनमत सर्वेक्षण में देश के 54 संसदीय क्षेत्रों के 9604 मतदाताओं की राय ली गई।
सर्वेक्षण में क्या केन्द्र सरकार के प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए डॉ. मनमोहनसिंह सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार हैं और क्या परमाणु करार भारत के पक्ष में है जैसे मुद्दों पर भी जनता की राय ली गई।
उत्तरप्रदेश में सत्तारूढ़ बसपा को छह फीसदी मतों की हिस्सेदारी के साथ 46 से 56 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इतने ही मतों की हिस्सेदारी के साथ वाम दलों को 37 से 47 सीटें मिलने का अनुमान है।
नौ फीसदी मतों की हिस्सेदारी के साथ तीसरे मोर्चे को 52 से 62 सीटों पर जीत मिल सकती हैं, जबकि 14 फीसदी मतों की हिस्सेदारी के साथ अन्य को 16 से 26 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
आडवाणी प्रधानमंत्री पद के लिए श्रेष्ठ प्रत्याशी : प्रधानमंत्री के पद के लिए जनता की नजर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सबसे पसंदीदा उम्मीदवार दिखे। प्रधानमंत्री के पद के लिए 17 फीसदी लोगों ने आडवाणी को अपनी पसंद बताई वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी 15 फीसदी तथा कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी इस पद के लिए 11 फीसदी लोगों की पसंद बने।
सक्रिय राजनीति से एक अरसे से बाहर पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी इस पद के लिए अब भी 11 फीसदी लोगों की पसंद हैं, जबकि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह इस पद के लिए नौ फीसदी लोगों की पसंद हैं। 36 फीसदी लोगों ने अन्य अथवा कह नहीं सकते की श्रेणी के लिए मतदान किया।
बहुमत एटमी करार के पक्ष में : विवादास्पद भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार के मुद्दे पर 42 फीसदी लोगों ने कहा कि यह करार भारत समर्थक है। 23 फीसदी लोगों की नजर में यह भारत विरोधी, जबकि 35 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपनी राय नहीं दे सकते। 31 फीसदी लोगों का कहना है कि वाम दलों का संप्रग सरकार से समर्थन वापसी का फैसला सही है, जबकि 40 फीसदी लोगों ने कहा कि यह फैसला सही नहीं है। soure - webdunia.com |