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महंगाई पर वामदल घेरेंगे सरकार को E-mail

 

लगातार बढ़ रही महंगाई के मुद्दे पर वामपंथी दल उसी सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं जिसे वे पिछले चार सालों से बाहर से समर्थन दे रहे

वामपंथी दलों ने महंगाई पर सरकार को 15 अप्रैल तक की मोहलत देते हुए कहा है कि इसके बाद वे देशव्यापी आंदोलन छेडेंगे और यह मुद्दा संसद में भी उठाया जाएगा.

इस बीच वामदल जनसभाएँ करके इसका विरोध करते रहेंगे.

तीसरा मोर्चे यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस (यूएनपीए) ने भी वामदलों के इस आंदोलन में साथ आने की घोषणा कर दी है.

उल्लेखनीय है कि मुद्रास्फ़ीति की दर पिछले तीन बरसों के अपने रिकॉर्ड ऊँचे स्तर पर पहुँचकर सात प्रतिशत हो गई है.

22 मार्च को समाप्त होने वाले हफ़्ते तक के आकलन के आधार पर पाया गया है कि महंगाई में बढ़ोत्तरी लगातार जारी है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक इससे पहले दिसंबर 2004 में मुद्रास्फीति की दर में रिकॉर्ड बढ़त देखी गई थी जब यह आंकड़ा बढ़कर 7.07 प्रतिशत तक पहुँच गया था.

हालांकि बढ़ती महँगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च महीने के अंत में कई उपायों की घोषणा की है लेकिन सरकार का कहना है कि इसका असर होने में थोड़ा समय लग सकता है.

आंदोलन

सरकार ने महंगाई पर रोक लगाने के लिए जो क़दम उठाए हैं उसे वामपंथी दल पहले ही ठुकरा चुके हैं और कहा है यह 'बहुत देर से उठाए गए बहुत थोड़े' से क़दम हैं.

वामपंथी नेता
वामपंथियों दल सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध करते रहे हैं

वामदलों ने कहा है कि यदि 15 अप्रैल तक महंगाई पर रोक नहीं लगती है तो सरकार को देशव्यापी प्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वाममोर्चा के चेयरमैन बिमान बोस ने कोलकाता में कहा है कि महंगाई के ख़िलाफ़ 10 अप्रैल के बाद जनसभाएँ की जाएँगीं.

उन्होंने कहा, "हमने वामदलों के सांसदों से कहा है कि वे महंगाई का मुद्दा 15 अप्रैल से शुरु हो रहे सत्र में ज़ोरदार ढंग से उठाएँ."

वामदलों ने वायदा कारोबार को रोकने और खुदरा बाज़ार से विदेशी निवेश की अनुमति वापस लेने की माँग की है.

उधर यूएनआई ने ख़बर दी है कि यूएनपीए के नेता चंद्राबाबू नायडू ने हैदराबाद में कहा है सीपीएम के महासचिव चंद्राबाबू नायडू से टेलीफ़ोन पर हुई चर्चा के बाद यूएनपीए ने महंगाई पर वामदलों के प्रदर्शनों में साथ रहने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार कालाबाज़ारी रोकने में पूरी तरह विफल रही है.

 
 
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