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सांसदजी राज्यसभा मे रो पडे |
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मानव मुल्यो का जितना हनन हमारे यहाँ हुया है , उतना शायद कही नही हुया है , और तो और हमे मानव मुल्यो की बवाने कि लिये कानुन का सहारा लेना पड रहा है इस से ज्यादा दुख की बात क्या होगी कि बेटो से बुढे माँ बाप को सहारे के लिये कानुन का सहारा लेना पडेगा जिसके लिये कानुन बनाने की चर्चा करते समय भाजपा के भाजपा के डॉ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया राज्यसभा मे रो पडे ।
राज्यसभा में गुरुवार एक भावुक नजारा उस समय देखने को मिला जब वरिष् नागरिकों के बारे में आए एक विधेयक पर चर्चा करते समय भाजपा के एक बुजुर्ग सदस्य फफक-फफककर रोने लगे।
माता-पिता एवं वरिष् नागरिक देखभाल और कल्याण विधेयक 2007 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा के डॉ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया इस बात का विशेष रूप से दुखी थे कि जिस देश में माता-पिता को देवता मानने की संस्कृति रही हो वहाँ अभिभावकों और वृद्धजनों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने की जरूरत पड़ गई है।
उन्होंने भारतीय समाज में बुजुर्गों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए एक घटना सुनाई। इसमें एक घर के बच्चे अपने मकान में लगा आम का पेड़ इसलिए काटना चाहते थे क्योंकि उसमें आम आने बंद हो गए थे। उसी घर के एक बुर्जुग ने बच्चों का आम का पेड़ नहीं काटने की नसीहत देते हुए कहा कि यह पेड़ आम नहीं दे रहा है तो क्या है कम से काम छाँव तो दे रहा है।
पिलानिया यह घटना सुनाते-सुनाते फफककर रोने लगे। उन्होंने भरे गले से माँग की कि बुजुर्गों को कम से कम पेंशन और चिकित्सा सेवा का अधिकार अवश्य दिया जाना चाहिए। |