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सांसदजी की चिंता, संसद के अपने सदस्यो का अविश्वास |
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भारत जैसे देश मे संसद किसी एक वेमुद्द मुद्दे पर ढंप हो जाती है जिससे आम जनता की कमाई को पानी की तरह बहाया जाता तथा जिसका कोई संम्बध सीधे तौर पर जनता से जुडा हुआ नही होता, जिससे कोई खास परिणाम भी नही निकलते , खासकर सत्ताधारी तो चाहते ही नही है कि संसद चले बस उनको ५ साल राज्य करने को दे दो , और हम से कोई सवाल संसद के बहार या अन्दर ना पुछा जाये , अगर बहस कोई होती है तो संम्बधित मंत्री संसद से छोटी क्लास की तरह गोल मार जाते है , मुखिया को भी चिंता है ,
संसद सत्रों के उत्तारोत्तार कम होते जा रहे दिनों से जुड़ी सदस्यों की चिंता पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि वह शीघ्र ही पी ासीन अधिकारियों की बै क बुला कर इस बारे में विचार करेंगे। भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने साल में संसद की 100 बै कें करने की मांग को लेकर शून्य काल में यह मामला उ ाया और कहा कि संसद सत्र साल दर साल छोटे होते जा रहे हैं। इससे संसद को अप्रासंगिक बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि संसद का वर्तमान शीतकालीन सत्र पिछले नौ वर्षो में सबसे छोटा सत्र है। उन्होंने कहा कि लगता है कि सत्ता में आने वाली हर सरकार इन सत्रों से काफी असहज महसूस करती है। वह चर्चा और आलोचनाओं से बचना चाहती है। संसदीय कार्य मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने सदस्य की इस बात पर कड़ा प्रतिवाद किया कि संसद अप्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से पूर्णत: असहमति जताता हूं कि संसद अप्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि संसद सत्रों के न्यूनतम दिन तय करने के संदर्भ में दो तीन साल से प्रयास हो रहे हैं। पी ासीन अधिकारियों के सम्मेलनों में भी प्रयास किए गए और साल में संसद की बै क न्यूनतम 100 दिन करने के साथ इस बात की भी सहमति बनी थी कि प्रश्न काल को बाधित नहीं किया जाएगा। दासमुंशी की इस बात का भाजपा के विजय कुमार मल्होत्रा सहित विपक्षी सदस्यों ने कड़ा प्रतिवाद किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि वह प्रश्न काल बाधित करने के लिए किसी पार्टी को जिम्मेदार नहीं हरा रहे हैं। सत्र छोटे होने की शिकायत पर प्रतिक्रिया जताते हुए रेल मंत्री लालू प्रसाद ने कहा कि हम गवाह हैं। प्रश्न काल के बाद कितने सदस्य सदन में रहते हैं। यह भी विचार करने की जरूरत है। इस पर अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि जी हां, सबको आत्म निरीक्षण करने की जरूरत है। संसदीय कार्य मंत्री ने दासगुप्ता की इस बात का प्रतिवाद किया कि संसद का वर्तमान शीतकालीन सत्र अब तक का सबसे छोटा सत्र है। उन्होंने कहा कि इससे पहले 16 और पांच दिनों के सत्र भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसद प्रासंगिक बनी हुई है। इसका सबूत यह है कि सदस्य देर रात तक सदन में बै े रहते हैं और मैं ऐसे सदस्यों को सलाम करता हूं। भाजपा के संतोष गंगवार ने भी हामी भरी कि हम देर रात तक सदन में बै ते हैं। इस पर चटर्जी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह सही है कि सदस्य देर रात तक बै ते हैं लेकिन इसके लिए वे अतिरिक्त भत्तो की मांग न करें। दासगुप्ता ने कहा कि जिस तरह संसद की अवहेलना की जा रही है, वह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बहस पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सत्र के दिन कम होने के कारण जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं हो पा रही है। |