आतिथिदेवौ भवः भारत का मुल मंत्र है , पर आज का कट्टरपंथीओ का राज है कहे तो वोट की चिंता है चाहे किसी भी पार्टी का हो , हा पर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का मौन रहना काबले तारीफ है , जिससे देश क्या विरासत की भी खिल्ली उड रही है , लेखिका का विरोध कम ही लोग कर रहे पर प्रभाव पुरे देश पर पड् रहा , प्रधानमंत्री को चाहिये की लेखिका तस्लीमा नसरीन भारतीय नागरिकता दे देना चाहिये ,
राजस्थान सरकार के एक वरिष् अधिकारी ने बताया कि भारतीय समयानुसार रात लगभग 12.45 बजे तस्लीमा को केंद्र सरकार के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया. उन्हें कहा ले जाया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. इधर तस्लीमा नसरीन को लेकर सोमवार को राजनीतिक बयानबाजी तेज़ रही. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की कोई भूमिका नहीं है. उनका कहना था कि ये निर्णय केंद्र सरकार को लेना है कि तस्लीमा नसरीन भारत में रहें या नहीं अथवा उनकी वीज़ा की अवधि बढ़ाई जाए या नहीं? दूसरी ओर भाजपा ने तसलीमा को राजनीतिक शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की है. भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खामोशी चिंताजनक है. उनका कहना था कि देश में शरण और वीज़ा देने के बाद भी तस्लीमा नसरीन को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़े, यह शर्मनाक है. विवाद ग़ौरतलब है कि इसके पहले तस्लीमा नसरीन ने कहा था कि वे वापस कोलकाता जाना चाहती हैं. टेलीविज़न चैनल एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, " मुझे अपने घर की याद आती है, मुझे कोलकाता की याद आती है." उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन की वीज़ा की अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में कोलकाता में हिंसा भड़क उ ी थी जिसमें 43 लोग घायल हुए थे. इसके बाद उन्हें राजस्थान भेज दिया गया था और फिर दिल्ली लाया गया था. विवादों में घिरीं लेखिका तस्लीमा नसरीन 1990 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकियों के कारण बांग्लादेश से यूरोप चली गई थीं और पिछले तीन साल से वे कोलकाता में रह रहीं थीं. उनके लेख इस्लामी कट्टरपंथियों को काफ़ी समय से अखरते रहे हैं. |