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गुजरात मे दंगे के जिन्न को भुनाने की कोशिश |
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सोनियाँ गाँधी हो या लालु यादव, या फिर कोई भी सबके सब मुस्सलीम वोट बैक के पीछे पडे रहते है क्यो कि कहते है कि इस्लाम मानने वालो को कौमी जनुन कुछ ज्यादा ही होता है और कोई भी इसे अपनी ओर कर सकते हो । इसमे निजके तबके के मुसलमानो कोई फक्र नही पडता कि उनका उपयोग नेता कर रहे है कि जेहादी , आतंकवादी या और कोई , जब जब चुनाव आते है , इन सब बातो का अहम बढं जाता है ,राजनितिक पार्टीयाँ इसका भरपुर उपयोग करती है फिर भुल जाती है ,
इस कडी मे पहले लालु यादव , अब सोनियाजी जैसे जैसे चुनाव की तारीक आती जायेगी फेहरिस्त बढ्ती जायेगी , गुजरात दंगों को मानवता विरोधी हैवानियत बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार को कहा कि ऐसी समाज विरोधी ताकतों का दृढ़ता से मुकाबला किया जाना चाहिए अन्यथा देश का धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक स्वरूप खतरे में पड़ जाएगा। प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने इस अवसर पर कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द्र तथा सर्वधर्म समभाव हमारी सभ्यता की बुनियाद है और श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भी इन्हीं मूल्यों को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमती इंदिरा गाँधी के लिए राष्ट्रीय एकता सिर्फ भावनात्मक मुद्दा नहीं था। वह राष्ट्रीय एकता को समग्र दृष्टि से देखती थीं।
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