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रुस मे मुखर्जी का स्वागत रस्म आदयगी भर रहा |
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भारत की रुस से बढ्ती दुरिया अब दिखने लगी है , हाल की मुखर्जी की यात्रा इस बात का सबुत है , अमेरिका से भारत की दोस्ती लगता रुस को रास नही आ रही है भारतीय मीडिया ने इस खबर से सरकार की नीद हराम कर दी है ,सरकार को इस पर सफाई देना पडी , साथ मे भाजपा ने सरकार को निशाने पर लिया ,
भाजपा सांसदजी ने सरकार को निशाने पर लिया , कहा कि यह बहुत चिंता की बात है कि मास्को हवाई अड्डे पहुँचने पर प्रणब मुखर्जी की तालाशी ली गई और यही नहीं देश में रहते हुए भी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने भारतीय मेहमान से भेंट तक करना उचित नहीं समझा।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि रूस ने मुखर्जी के साथ ऐसा अप्रत्याशित आचरण क्या भारत के साथ किसी नाराजगी को जताने के लिए किया है या यात्रा प्रबंधन में विदेश मंत्रालय की ओर से कोई चूक या जल्दबाजी हुई है।
भाजपा ने कहा कि सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण दिया जाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि रूस भारत का पुराना मित्र देश है और उसने संकट की कई घड़ियों में भारत का डटकर साथ दिया है। उससे ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। यह बताया जाए कि किन परिस्थितियों में यह सब हुआ। प्रणब 11 अक्टूबर को तीन दिवसीय यात्रा पर रूस गए थे।
हवाई अड्डे पर नहीं ली गई तलाशी : कांग्रेस ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया कि रूस की हालिया यात्रा के समय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की मास्को हवाई अड्डे पर तलाशी ली गई थी। पार्टी ने कहा कि उनके साथ सभी 'राजनयिक शिष्टाचार' निभाए गए।
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि उनकी जामा तलाशी नहीं ली गई। कुछ भ्रम था। प्रोटोकाल उनके ीक पीछे था।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मुखर्जी से मुलाकात नहीं करने के बारे में मोइली ने कहा कि एक बै क निर्धारित थी, लेकिन रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ईरान के रास्ते में थे और लावरोव अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस के साथ बै क में व्यस्त थे।
उन्होंने कहा कोई अपमान नहीं हुआ। कूटनयिक संबंध अब भी जस के तस हैं और इस घटनाक्रम में कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं है। मोइली ने कहा कि भारत और रूस नैसर्गिक सहयोगी हैं तथा उनके बीच बहुत अच्छा रिश्ता है जो जारी रहेगा। उन्होंने कहा उनकी (मुखर्जी की) तलाशी नहीं ली गई, जैसा जॉर्ज फर्नांडीस के मामले में हुआ था। |