केंद्रीय संचार राज्यमंत्री और पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद ने यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि इस समझौते के बारे में वाम दलों की चिंताओं पर विचार करने के लिए बनाई गई संप्रग और वाम दलों की समिति की अगली बै क इसी महीने की 22 तारीख को होगी। परमाणु करार को ंडे बस्ते में नहीं डाला गया है और यह समझौता अभी भी खत्म नहीं हुआ है।
सांसदजी ने कहा कि अगर समझौता ंडे बस्ते में डाल दिया गया होता तो इस तरह की बै क की आवश्यकता समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि 22 तारीख को ही यह तय होगा कि समिति की और बै कें होंगी या नहीं। जब उनसे कहा गया कि स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश से कहा है कि समझौते को अमल में लाने में मुश्किलें हो रही है तो अहमद ने कहा इस का मतलब यह कतई नहीं है कि समझौते को ंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि समझौते को लेकर सरकार और वाम दलों में मतभेद है, जिन्हें बातचीत के द्वारा कम करने का प्रयास किया जा रहा है। अहमद ने कहा कि कांग्रेस का आज भी यह मानना है कि यह समझौता राष्ट्र हित में है क्योंकि इसके कारण देश को मिलने वाली ऊर्जा में बढ़ोतरी होगी। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफा देने की अटकलों को निराधार बताते हुए कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ऐसा न तो कोई सवाल है और न ही इरादा। केंद्रीय संचार राज्यमंत्री और पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद ने यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने खुद इस तरह की अटकलों के बारे में पहली बार सुना है। एक संवाददाता ने उनसे जानना चाहा था कि क्या प्रधानमंत्री अपने सत्ताधारी ग बंधन के समर्थक दलों से दुखी और नाराज हैं तथा इसलिए वे अपने पद से इस्तीफा देना चाहते हैं। अहमद ने स्वीकार किया कि यह एक ग बंधन है इसलिए समय-समय पर कुछ सहयोगी दलों की कुछ विषयों पर अलग राय हो सकती है। लेकिन जब कभी भी ऐसा होता है तो बातचीत के जरिए ऐसे सहयोगी दल को मनाने की कोशिश की जाती है। |