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रामजी नही छोडेगे लंका तक सरकार को |
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देश मे हिन्दी भाषी क्षेत्र मे भगवान राम की रामलीला नवरा्त्र मे जगह जगह आयोजित की जाती है , भाजपाई जहाँ भी मोका मिलता है वहाँ पर राम के सम्बंध मे काँग्रेस सरकार के नुमाईन्दो की गई दुर्भाग्यपुर्ण टिप्पणी को जोरशोर से उ ाते है , जिससे काँग्रेस को बार बार अपनी गलती स्वीकार करना पडती है , पत्रकार बंधु पीछा भी इसी बात का करते है ,
सांसदजी , मंत्री सुरेश पचौरी ने आज यहां कहा कि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) द्वारा उच्चतम न्यायालय में पेश किया गया हलफनामा वास्तव में आपत्तिाजनक था। बिलासपुर के पास कोटा में एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने आये श्री पचौरी ने पत्रकारों से कहा कि रामसेतु के संबंध में उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए एएसआई के हलफनामे में पैरा सात एवं बीस में हम सबके आराध्य भगवान श्रीराम के बारे में जो टिप्पणी की गयी वह निश्चित रूप से आपत्तिाजनक और अनावश्यक थी। उन्होंने बताया कि इसी कारण कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने न केवल आपत्तिाजनक अंशों को हटवाया बल्कि उस हलफनामे क ो ही वापस लेने के निर्देश दिए। रामसेतु मुद्दे को लेकर भाजपा के विरोध पर केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सेतुसमुद्रम परियोजना को भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग बंधन (राजग) सरकार ने ही हरी झण्डी दिखायी थी। वर्ष 2001 में श्री अरूण जेटली ने जहाजरानी मंत्री के रूप में नीरी नामक शोध संस्थान को इस बारे में अध्ययन करने को कहा था। श्री पचौरी ने बताया कि 23 अक्टूबर 2002 को नीरी का प्रस्ताव मिलने पर श्री जेटली के बाद के जहाजरानी मंत्री वेदप्रकाश गोयल और श्री शत्रुघ्न सिन्हा ने परियोजना को आंशिक फेरबदल के साथ शुरू करने की अनुमति दी थी। श्री सिन्हा ने तो 23 सितम्बर 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की तरफ से संसद में कहा था कि सेतुसमुद्रम परियोजना उसी रूप में लागू की जायेगी। |