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देश के बाँस ने महापौर एंव निगमायुक्तों की क्लास ली:- जागरन |
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सांसदजी ने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन शुरू होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने मिशन की समीक्षा बै क ली। श्री सिंह ने मिशन के जरिये विकास कार्यो के लिए एक और रास्ता खोलते हुए कहा कि राज्य और नगरीय निकाय अब जनसहयोग वाली योजनाएं भी मंजूरी के लिए भेज सकते हैं। अब तक जनभागीदारी वाली योजनाओं को मिशन में स्वीकार नहीं किया जा रहा था
सांसदजी ने बै क में सभी 63 शहरों के महापौर व निगमायुक्तों के अलावा विभागीय मंत्री और आला अफसर शामिल हुए। मध्यप्रदेश से इंदौर, भोपाल, जबलपुर व उज्जैन के महापौर तथा निगमायुक्तों के अलावा नगरीय प्रशासन मंत्री नरोत्तम मिश्र, प्रमुख सचिव राघवचंद्रा तथा आयुक्त मलय श्रीवास्तव शामिल हुए। मलय श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी और निजी भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री ने दो विकल्प सुझाए। पहला, पूल डेवलपमेंट फंड, जिसके लिए केंद्र ने 500 करोड़ का कोष बनाया है। दूसरा, कम्युनिटी पार्टीसिपेशन फंड, जिसके लिए 100 करोड़ का कोष बनाया गया है। डॉ. मनमोहनसिंह ने प्रदेश सरकारों और नगरीय निकायों से अपील की कि इन विकल्पों का लाभ उ ाएं और नई योजनाएं भेजें। नगरीय प्रशासन आयुक्त मलय श्रीवास्तव ने बताया कि नेहरू मिशन कारिफॉर्म एजेंडा लागू करने के मामले में मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से बेहतर स्थिति में रहा। रिफॉर्म एजेंडा में 74वां संविधान संशोधन लागू करना, शहरी सीलिंग कानून समाप्त करना, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया का सरलीकरण, कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदलने और रूफ वाटर हार्वेस्िटग जैसी योजनाएं शामिल हैं। साथ ही गरीब व पिछड़ी बस्तियों में मूलभूत विकास कार्यो को लेकर प्रदेश की तारीफ की गई। नगरीय प्रशासन आयुक्त के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इस बात को माना कि नगरीय निकायों के पास विशेषज्ञों की कमी है। उन्होंने कहा कि नोडल एजेंसियां बताएं कि उन्हें कौन-से कंसल्टेंट्स की जरूरत है। इनकी पूर्ति केंद्र करेगा। इस मामले में मध्यप्रदेश पहला राज्य रहा, जिसने लगभग 10 विशेषज्ञों की सूची सौंपी है। इसमें प्रोजेक्ट मॉनीटर, ई-गवर्नेस विशेषज्ञ, खाता विशेषज्ञ, सीवरेज विशेषज्ञ तथा रोड व ब्रिज विशेषज्ञों की मांग की है। बै क में इंदौर, भोपाल, जयपुर, पुणे जैसे शहरों के लिए और योजनाएं बनाने के लिए ज्यादा धनराशि की मांग की गई। इस पर केंद्र ने कहा कि विचार किया जाएगा। |