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लो वाम सांसदजी भी गुर्राये , डी राजा E-mail
Indian communists India's communist ... सोनिया गाँधी की परोक्ष धमकी के जबाब मे वामदलो को कुछ ना कुछ तो कहना था तो ,भाकपा महासचिव एबी बर्धन और राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने पुरानी बात को नये अंदाज में कही कि हम सरकार को ज्यादा दिन तक नही चलने देगें , वाम भी कही न कही परमाणु करार मे उलक्ष गये है कोशिश तो निकलने की है पर अब काँग्रेस निकलने नही दे रही है किसी न किसी बहाने वाम को छेडती रहती है । काँग्रेस चुनाव का जिम्मा अपने ऊपर नही लेना चाहती

परमाणु करार को लेकर संप्रग से रिश्तों की गाड़ी पटरी से उतरना तय मानकर वामदलों ने मध्यावधि चुनाव के लिए अपना मन पक्का कर लिया है। एटमी समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाने को लेकर सरकार की बेताबी से खफा कामरेड नौ अक्टूबर को होने वाली चौथे दौर की चर्चा से कोई हल निकलता नहीं देख रहे हैं। इधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को हरियाणा में एक रैली के दौरान कामरेडों पर परोक्ष रूप से निशाना साधकर वामदलों की इस सोच को और पुख्ता कर दिया।

टकराव के स्पष्ट संकेत देते हुए वाम सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार ने करार पर अपना पुराना राग अलापा तो नौ अक्टूबर की चर्चा के बाद इस मुद्दे पर और कोई बै क नामुमकिन होगी। ऐसे में सरकार से समर्थन वापस लेना ही वामदलों के पास एकमात्र विकल्प बचेगा। बताया जाता है कि माकपा महासचिव प्रकाश करात ने अपनी राय सुलह समिति की शुक्रवार की बै क के दौरान ही स्पष्ट कर दी थी। बै क से पहले उन्होंने भाकपा नेताओं के साथ समर्थन वापसी के विकल्प पर चर्चा भी की। माकपा पोलित ब्यूरो की बै क 18 अक्टूबर को होगी। अगले दिन 19 को पार्टी की केंद्रीय समिति की बै क होनी है। इन बै कों में सरकार से समर्थन वापसी पर विचार होगा।

इधर सुलह समिति की बै क के दो दिन पहले रविवार को सोनिया ने वामदलों का नाम लिये बिना कह दिया कि परमाणु करार का विरोध करने वाले केवल कांग्रेस के ही नहीं बल्कि देश में विकास और शांति के ही दुश्मन हैं। ऐसे 'तत्वों' को जनता मुंहतोड़ जवाब दे देगी। इससे सरकार और वामदलों के बीच रिश्ते और बिगड़ना तय है।

भाकपा महासचिव एबी बर्धन और राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा कि वामदल राष्ट्र हित में नाभिकीय ऊर्जा करार का विरोध कर रहे हैं। सोनिया के बयान का संदर्भ लेते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही लोगों पर चुनाव लादना चाह रही है। वामदल मध्यावधि चुनाव की वजह कतई नहीं बनना चाहते। कामरेड यह साबित करने की कोशिश में हैं कि चुनाव की स्थिति के लिए सरकार खुद ही जिम्मेदार है। वे इसका दोष कांग्रेस के ही सिर मढ़ना चाहते हैं। ऐसे में सोनिया के बयान से उन्हें मौका भी मिल गया है।

समिति की बै क से पहले शुक्रवार को प्रकाश करात और भाकपा महासचिव एबी बर्धन ने सरकार से नाता तोड़ने को लेकर चर्चा की है। बताया जाता है कि दोनों वामदल महासचिवों ने यह भी जायजा लिया कि मध्यावधि चुनाव की स्थिति में वाममोर्चा कहां खड़ा है? कामरेडों की यही राय है कि परमाणु करार पर समझौता करने का कोई प्रश्न ही

 

news- jagran

 
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