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लोकतंत्र का मजाक सभी उडाते है भारत हो या पाकिस्तान |
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जनता जिसके कमाई पर राजनितिक चुन कर सत्ता पर काबिज होते है उसकी पुछ परख अमेरिका में ४ साल में ब्रिटिस उपनिविश शासित राज्य में ५ साल में जहाँ लोकतंत्र है और जहाँ नही है कोशिश कर रहे है वहाँ समय सीमा निर्धारित नही है पर जनता देश को लोकतंत्र के सपने दिखाये जाते है , एक टके का है कि लोकतंत्र कई बार मात्र कुछेक आदमीयो के हाथो मे नाचने लगता है क्यो ? कर्नाटक हो या इस्लामाबाद क्या फर्क है दोनो में । दोनो लोकतंत्र कीअपनी अपनी परिभाषा कर रहे है
जनता जिसको नेतागण निहित मुर्ख और न जाने क्या क्या उपनाम से बुलाते है , कर्नाटक में जो हुआ वो क्या जनता की गलती थी हो सकता वाम के कारण यह सब देश को भोगना पडे वो भी जनता की गलती से , लगभग १००० करोड रुपये खर्व होगे् और न जाने कितने जिनका हिसाब अगले १० बीस सालो तक जाँच का बिषय बनेगा , जिससे सार देश की सडको की मरम्मत करवाई जा सकती है,न जाने क्या क्या हो सकता इस खर्चे को २ साल तक और टाला जा सकता है , इन सबके पीछे अगर गौर किया जाये तो कितने लोग है जिनको उँगलीऔ पर गिना जा सकता है , चाहे कर्नाटक हो या मेरा भारत महान । |