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काग्रेस की सेतु पर माफी की गुहार |
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कांग्रेस की मासिक पत्रिका 'कांग्रेस संदेश' में रामसेतु पर एक प्रकार से कहे तो माफीनामा छापा है , संदेश देने की को कोशिश की गई है कि हम से गलती हो गई, रामसेतु को कही भाजपा चुनावी मुद्दा न बना ले इस बात का डर सबको है , क्यो कि दक्षिण भारत में राम की मान्यता कम नही है , भले ही कई जगह रावण को पुजा जाता है पर राम पर कई किताबे दक्षिण भारतीयो मे खासी लोकप्रिय है , भाजपा कही रामसेतु पर से दक्षिण भारत मे पैढ न बना ले ?
कांग्रेस के वरिष् नेता डॉ. कर्णसिंह का मानना है कि रामसेतु मामले में भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण ने जो पहला शपथ-पत्र उच्चतम न्यायालय में दायर किया था वह न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि अनुचित एवं अपमाजनक भी है। कांग्रेस की मासिक पत्रिका 'कांग्रेस संदेश' के सितंबर अंक में सिंह ने कहा कि वह शपथ-पत्र न सिर्फ भारत एवं दुनिया के हिंदुओं के लिए बल्कि उन सबके लिए जो हमारे बहुलवादी सांस्कृतिक विरासत को अपना मानते हैं, उनके लिए भी अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि हम पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विवाद में घिरे थे। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने हमारे लिए और भ्रम एवं तनाव की स्थिति पैदा कर दी। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह मत प्रकट किया है कि रामसेतु सिर्फ रेत और मूँगे की चट्टान की दीवार है, जिसे ऐतिहासिक पुरातात्विक अथवा अन्य प्रकार का कोई महत्व नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह प्रामाणिक विचार है कि जिसका खंडन समान आधार पर ही किया जा सकता है। सिंह ने कहा कि फिर भी भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने एक हद से आगे जाकर तथा कुछ टिप्पणी करके राष्ट्र को एक झटका दे दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शपथ-पत्र में राम के एक इतिहास पुरुष होने के सत्य को ही झु लाया है। सिंह ने कहा कि यह उल्लेखनीय तथ्य है कि रामायण की कथा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। इसकी सुगंध पूरे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया तक फैला हुई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि कम्बोडिया के अंगकोरवाट स्थित भव्य मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा पूजा स्थल है। सिंह ने कहा कि उसकी दीवारों पर रामायण और महाभारत की पूरी कहानियाँ दर्ज हैं तथा इंडोनेशिया में हमारे यहाँ की रामलीलाओं की तुलना में बड़े ही पावन एवं संवेदना के साथ रामलीलाएँ की जाती हैं और यह भी सारे मुसलमान कलाकारों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के हिंदू राम को ईश्वर का अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम और आदर्श व्यक्ति मानते हैं। सिंह ने कहा कि महात्मा गाँधी ने भी आदर्श समाज की परिकल्पना इसी आधार पर की थी। उन्होंने राम राज्य लागू करने की बात की थी। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत की अपेक्षा उत्तर भारत में रामलीलाएँ ज्यादा प्रचलित हैं, लेकिन उससे इनका महत्व कम नहीं होता। | | news - webdunia.com | |