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दादा सोमनाथ ने मतदाताऔ को अधिकार देने की वकालत की |
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एक बार पैसा लगाऔ पाँच साल फसल काटो , शायद ऐ मुहावता बदल जाये लोकसभा अध्यक्ष दादा सोमनाथ चटर्जी ने 53वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में मतदाताओं को प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार दिए जाने की पुरजोर वकालत की। पर दादा को नही मालुम भारत मे राजनितिक लोग इस को व्यापार कहते है सामजसेवा तो दुर की कौडी है
एक बार पैसा लगाऔ पाँच साल फसल काटो कि तर्ज पर ही लगभग सभी राजनितिक चुनाव में पैसा लगाते जो उनका नही होता है लोग राजनितिको को फाईनेस करते जिसके किश्ते आने बाले पाँच साल बसुलते रहते है नही व्यापारीऔ को क्या पडी है इनको पैसा देने की , दादा की इस कोशिश को लोकसभा के सदस्य भी मान्यता दे तो बाकई देश का भला हो सकता, फिर मतदाता को सही अपने अधिकार मिलेगें हालाँकि सम्मेलन के कुछ अन्य प्रतिनिधियों ने इससे असहमति व्यक्त की। सम्मेलन की समाप्ति पर एक प्रेस कांफ्रेंस में चटर्जी ने कहा कि मतदाताओं को यह अधिकार किस रूप में दिया जाए इसकी सुविचारित प्रणाली तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हड़बड़ी की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन विधायकों और सांसदों में जवाबदेही सुनिश्चत करने के लिए समुचित प्रणाली बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र भरते समय प्रत्याशी समुचित आचरण का आश्वासन देता है तथा चुनाव प्रचार के दौरान अपने घोषणा-पत्र और नीतियों के आधार पर वोट माँगता है। निर्वाचित होने के बाद वह इन पर कायम रहे। संसदीय लोकतंत्र में इसकी व्यवस्था होनी चाहिए।
विधानमंडलों की कार्यवाही के दौरान सांसदों, विधायकों के अवांछनीय व्यवहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधि मर्यादित आचरण नहीं करते तो उन्हें ऐसा आचरण करने के लिए बाध्य करने की व्यवस्था होनी चाहिए1
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