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राज्यसभा सांसदजी, भाजपा नेता श्री जना कृष्णमूर्ति नहीं रहे |
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सांसदजी , भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. जनाकृष्णमूर्ति का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को यहाँ एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे।पार्टी सूत्रों ने बताया कि गुर्दे संबंधी बीमारी से पीड़ित कृष्णमूर्ति को एक माह पूर्व अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इसके बाद वे कोमा में चले गए थे। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ हैं।
कार्यकर्ता से अध्यक्ष तक का सफर : वकालत से राजनीति में आए के. जनाकृष्णमूर्ति एकमात्र ऐसे तमिल नेता थे, जिन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज के बाद किसी राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल हुआ।
कृष्णमूर्ति का जन्म 24 मई 1928 को मदुरै में एक वकील परिवार में हुआ था। उन्होंने मात्र 12 वर्ष की बाल्यावस्था में आरएसएस की सदस्यता ली थी और 73 वर्ष की आयु में 2001 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
कृष्णमूर्ति ने चौथी पीढ़ी में पारिवारिक विरासत के रूप में वकालत को पेशे के रूप में अपनाया। वे बचपन से ही राजनीति में रुचि लेते थे और छात्र जीवन में ही उन्होंने एक विषय के रूप में राजनीतिशास्त्र को चुना था। उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री हासिल की थी।
सन 1951 में पिता की मृत्यु के बाद कृष्णमूर्ति आरएसएस के पूर्णकालिक सदस्य हो गए और तमिलनाडु के प्रांत प्रमुख बने। आरएसएस प्रमुख गुरुजी गोलवलकर के कहने पर उन्होंने 1965 मे भाजसं की सदस्यता ली, उन्हें पार्टी का राज्य सचिव नियुक्त किया गया। तीन साल बाद वे वकालत छोड़ भाजसं के वरिष् नेता अटलबिहारी वाजपेयी के आह्वान पर पूर्णकालिक राजनीति में चले आए।
कृष्णमूर्ति 1975 में आपातकाल के दौरान तमिलनाडु में पार्टी के सचिव थे और उन्होंने उसके विरोधी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1977 में जनसंघ के जनता पार्टी में विलय के बाद वे पार्टी की राज्य इकाई के महासचिव बन गए।
उन्होंने 1980 में अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, एसएस भंडारी, कुशाभाऊ ाकरे और जगन्नाथ राव जोशी के साथ मिलकर भाजपा की नींव रखी। वे भाजपा के संस्थापक सचिवों में से एक थे।
वर्ष 1983 में वे भाजपा के महासचिव तथा 1985 में उपाध्यक्ष बने। उन्होंने वर्ष 1980 से 1990 के दौरान दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में पार्टी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी।
आडवाणी के कहने पर वे 1993 में दिल्ली आए और पार्टी की बौद्धिक, आर्थिक, रक्षा तथा विदेश शाखा के प्रमुख बनाए गए। वर्ष 1995 में वे भाजपा मुख्यालय के प्रभारी बने और बाद में पार्टी प्रवक्ता बने। |