पार्टी संग न में किए गए बड़े फेरबदल में युवा नेताओं के अलावा कुछ मंत्रियों और वरिष् नेताओं को संग न का काम सौंपे जाने तथा महासचिवों की संख्या बढ़ाए जाने से साफ है कि पार्टी ने मध्यावधि चुनावों के लिए कमर कस ली है। परमाणु मुद्दे पर वामदलों और सरकार के बीच जारी तकरार से ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले वर्ष मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं।
पार्टी में गाँधी को अहम भूमिका देने की लंबे समय से उ रही माँग को स्वीकार करते हुए श्रीमती गाँधी ने उन्हें महासचिव बनाने के साथ युवक कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संग न की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी को उम्मीद है कि इससे बड़ी संख्या में युवाओं को कांग्रेस के साथ जोड़ने में मदद मिलेगी।
गाँधी को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप पार्टी को तैयार करने के लिए पहली बार बनाए गए 13 सदस्यीय समूह में भी शामिल किया गया है। महासचिव के रूप में वे कार्यसमिति की बै कों में भी हिस्सा लेंगे। उन्हें पार्टी की प्रचार और प्रकाशन समिति का भी सदस्य बनाया गया है।
श्रीमती गाँधी ने अजय माकन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जतिन प्रसाद, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, संदीप दीक्षित, प्रिया दत्त और अलका लांबा को पार्टी में जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया कि आने वाले समय में पार्टी में नई पीढ़ी का बोलबाला रहेगा। इन युवा नेताओं को राहुल का करीबी माना जाता है। पार्टी सूत्रों का कहना है निकट भविष्य में केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी युवाओं को अधिक जगह दी जाएगी।
पार्टी में आज चार नए महासचिव नियुक्त किए गए हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़कर ग्यारह हो गई है। श्रीमती गाँधी ने मौजूदा महासचिवों को बनाए रखा है, लेकिन जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। गाँधी के अलावा पार्टी की वरिष् नेता मोहसिना किदवई, किशोरचंद देव और पृथ्वीराज चव्हाण को महासचिव बनाया गया है।
अगले वर्ष होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह माना जा रहा था कि अशोक गहलोत को पार्टी संग न से मुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन उन्हें महासचिव बनाए रखा गया है। उनसे उत्तरप्रदेश का प्रभार लेकर यह जिम्मेदारी दूसरे महासचिव दिग्विजयसिंह को सौंपी गई है, लेकिन वह दिल्ली और सेवादल के प्रभारी होंगे। सिंह के पास अब बिहार, असम और आंध्रप्रदेश का प्रभार नहीं रह गया है।
बिहार का प्रभार नए महासचिव किशोरचंद देव को सौंपा गया है। जनार्दन द्विवेदी से हरियाणा, पंजाब और मीडिया विभाग का प्रभार ले लिया गया है। वह अब संग न, संग न चुनाव और प्रशिक्षण का काम देखेंगे। इस फेरबदल में श्रीमती मार्गरेट अल्वा की जिम्मेदारियाँ बढ़ा दी गई हैं। वे अब महाराष्ट्र के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड का प्रभार देखेंगी।
श्रीमती किदवई को केरल, लक्षद्वीप, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा महिला कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। चव्हाण कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम तथा त्रिपुरा का कामकाज देखेंगे।
नारायण सामी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़, मुकुल वासनिक राजस्थान और बीके हरिप्रसाद गुजरात, गोवा, दादर और नगर हवेली तथा दमन एवं दीव का कार्यभार देखेंगे।
महासचिवों के अलावा कुछ अन्य नेताओं को भी राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। इनके नाम हैं- अजय माकन (झारखंड और उड़ीसा), आरके धवन (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), वीरप्पा मोइली (आंध्रप्रदेश और असम) तथा अरुण कुमार (तमिलनाडु और पांडिचेरी)।
कार्यसमिति के मौजूदा सदस्यों को बरकरार रखा है, सिर्फ आज बनाए गए तीन महासचिवों को इसमें जगह मिल गई है, जिससे इसके सदस्यों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। कार्यसमिति के दो स्थान अभी भी रिक्त हैं।
कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्यों में कुछ फेरबदल किया गया है। जहाँ हरिकेश बहादुर, नूरबानो, रामनरेश यादव और मुकुट मिथी इससे बाहर हो गए हैं, वहीं अजय माकन तथा अरुण कुमार को इसमें जगह दी गई है। विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या 13 से घटाकर छह कर दी गई है।
उत्तरप्रदेश का नया प्रभारी बनाने के साथ प्रदेश कांग्रेस का भी नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस राज्य में पार्टी की बागडोर अब श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी संभालेंगी, जो इस समय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं।
तीन और राज्यों में भी प्रदेश अध्यक्ष बदले गए हैं। पंजाब में राजिंदर कौर भट्टल को अध्यक्ष तथा दलित नेता मोहिंदरसिंह केपी को कार्यकारी अध्यक्ष, राजस्थान में सीपी जोशी को अध्यक्ष और परसराम मोरदिया को कार्यकारी अध्यक्ष तथा उत्तराखंड में यशपाल आर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। news - webdunia |