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रामसेतु को जहाजो के लिये जगह देनी ही होगी |
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मंत्रीजी टीआर बालू ने सेतु समुद्रम नहर को रामसेतु को ही जगह देना होगा चाहे भाजपा या संघ चीखे चिल्लाये , हिन्दु भावना से लेना देना तो है पर मजबुरी है मुसलिम बोट बैक का सबाल है , मेडम का भी ध्यान रखना है , २५०० करोड् का सबाल है ेका दे दिया गया है ेकेदार काम करने आगे कमीशन बट गया , विरोध का क्या करे , सरकार मे मत्री रहना है तो चंदा तो देना होगा , आगे चुनाव हे पैसा कहाँ से आयेगा बहुत सारी बातो का ध्यान रखना पडता है मंत्रीजी को ? हिन्दु भावना,देश तो बाद की बात ।
बालू ने शनिवार को कहा कि केंद्र मौजूदा मार्ग के जरिये ही परियोजना के कार्यान्वयन की अनुमति के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।
द्रमुक प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनके नेता ने बयान आवेश में आकर दिया था। करुणानिधि ने कहा था कि वे वैकल्पिक मार्ग के खिलाफ नहीं हैं।
सेतु मामले में भाजपा के विरोध पर निशाना साधते हुए बालू ने कहा कि प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग को 1999 में राजग सरकार के कार्यकाल के दौरान पर्यावरण मंत्रालय ने खारिज कर दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी परियोजना और मौजूदा मार्ग को मंजूरी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान दी गई थी और पार्टी नेता अब राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़का रहे हैं।
रामसेतु भारत के नक्शे में नहीं : केन्द्रीय जहाजरानी मंत्री टीआर बालू ने कहा कि भारत के नक्शे में रामसेतु कहीं नहीं है, बल्कि उसके स्थान पर केवल एडम्स ब्रिज का जिक्र है।
हलफनामा न बदलने का अनुरोध : द्रविड़ कषगम के कार्यकर्ताओं ने रामसेतु के मुद्दे पर शनिवार को कोयंबटूर शहर में प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से उच्चतम न्यायालय में पूर्व में दाखिल हलफनामे को न बदलने का अनुरोध किया।
द्रमुक कषगम का झंडा और तख्तियाँ लिए कार्यकर्ताओं ने अपनी माँग के पक्ष में नारे भी लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सांप्रदायिक ताकतों के आगे नहीं झुकना चाहिए और सेतु समुद्रम परियोजना जारी रखना चाहिए। |