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सांसदजी ने अशोक चक्र पर सबाल उ ाये |
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भाजपा के वरिष् नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अशोक की लाट को राजचिह्न और अशोक चक्र को राज प्रतीक बनाए जाने पर सवाल उ ाते हुए कहा कि सेकुलरवाद का पा पढ़ाने वालों ने उस साम्राज्य के चिह्न को अपनाया है जिसका शासकीय मत बौद्ध धर्म था।News- Daink Jagran
आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य के ताजा अंक में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि जिस राज्य का शासकीय मत बौद्ध पंथ था उसका वर्तमान शासन ने राजचिह्न ले लिया लेकिन वह हमें सेकुलरवाद का पा पढ़ा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने अशोक का राजचिह्न लिया हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मैं सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि भारतीय परंपरा में कभी भी मजहबी राज्य की कल्पना नहीं रही है। समर्थकों द्वारा इन दिनों देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किए जा रहे आडवाणी ने अपने इस तर्क को वजन देते हुए संघ में गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध सदाशिव गोलवालकर को उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि परमपूज्य गुरुजी ने गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर लगे प्रतिबंध को नहीं हटाने के सरकार के इस तर्क को विचित्र बताया था कि चूंकि अभी सेकुलर संविधान बनाया जा रहा है इसलिए सेकुलरवाद में विश्वास नहीं रखने वाले संघ से फिलहाल प्रतिबंध नहीं हटाया जा सकता है। आडवाणी के अनुसार गोलवालकर ने उनसे कहा था कि जिस सरकार ने तय किया है कि उसका राजचिह्न अशोक की लाट को बनाया जाएगा और आशोक चक्र को राज प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाएगा लेकिन सम्राट अशोक का राज्य वर्तमान मान्यताओं के अनुसार सेकुलर नहीं था। उन्होंने कहा कि अशोक का राज्य भारतीय इतिहास में एक अकेला साम्राज्य कहा जा सकता है जो बौद्ध मतावलंबी था अर्थात जिसे अंग्रेजी में थियोक्रेसी कहते हैं। |