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सांसदजी कविवर बने,कविता भाजपाईऔ के लिये प्ररेणा |
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नेहरुजी ने कभी कहाँ था कि तुम को मेरा विरोध करना चाहिये,इन्दिराजी ने जिनको भारत के विदेशो से रिश्ते सुधारने लिये दुनिया भर मे भेजा , अटल बिहारी वाजपई,नेता , कवि,विचारक, लेखक शायद कोइ भारतीय नेता हो ,जिसके चेहरे का तेज और भाषण सुनने के लिये देश क्या, आलोचक क्या ,सभी बेताब रहते है . भाजपा के शिरमौर तो है ही , भाजपा की भोपाल में हो रही कार्यकारिणी की बै क शामिल न हो पाने के लिये क्षमा माँगी तथा , एक कविता अपने चहाने वालो के नाम भेजी ,
आहुति बाकी, यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा, अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ, आओ फिर से दिया जलाएँ। स्वास्थ्य कारणों से बै क में शामिल नहीं हो पाने वाले भाजपा के शीर्ष नेता वाजपेयी ने एक पत्र लिखा है, जिसका वाचन पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह ने बै क प्रारंभ होने के बाद किया।
वाजपेयी ने पत्र में लिखा है कि स्वास्थ्य कारणों की वजह से वे बै क में नहीं आ पा रहे हैं, इसलिए उन्हें खेद है। उन्होंने कहा- स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों का परामर्श मेरी इच्छाशक्ति पर भारी पड़ा है। मैं अनुपस्थिति के लिए आप सबसे क्षमा चाहता हूँ।
उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी की बै क संक्रमण बेला में हो रही है। केंद्र में राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल है। देश के सामरिक हितों पर आँच आती दिखाई दे रही है। ऐसे में हताश सत्तारूढ़ दल बदहवासी में जनता की भावनाओं पर चोट कर रहा है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
वाजपेयी ने रामसेतु मुद्दे का जिक्र किए बगैर लिखा है- देश हमारी ओर देख रहा है। हमसे काफी अपेक्षाएँ हो गई हैं। हमें इन अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। राष्ट्र के प्रति दायित्व से हम मुँह नहीं मोड़ सकते। मुझे विश्वास है कि आप सभी सामूहिक रूप से चिंतन कर आगे की रणनीति तय करेंगे। हम सभी एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने में सफल होंगे।
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