|
सांसदजी एवं महारथी वाजपई के बगैर भोपाल मे रामसेतु पर चर्चा |
|
|

वाजपई की गैर हा जिरी में भोपाल में आज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बै क शुरू हो रही है. इसमें 'रामसेतु' के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा. आडवानी को अपना नेता चुनने पर विवाद तो है पर विरोध कम ही है , उनके पसन्द के भाजपा शासितराज्य मे मुख्यमंत्री है संघ की पहली पसंद , और भी कई मामले में वे औरो से कोसो आगे है , पर जे दुर की कोडी है
शुक्रवार से शुरू हो रही इस तीन दिवसीय बै क में पार्टी संभावित चुनावी मुद्दों पर चर्चा करेगी. बै क के पहले ही दिन सेतुसमुद्रम या 'रामसेतु' के मामले पर वरिष् नेता मुरली मनोहर जोशी एक प्रस्ताव पेश करेंगे जिस पर चर्चा होगी. वो रामसेतु रक्षा मंच के सदस्य भी हैं.हालाँकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि पार्टी 'रामसुते' को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाएगी.उनका कहना था, "हम इस मामले को राजनीति से परे रखेंगे. इस मुद्दे को रामसेतु रक्षा मंच की ओर से उ ाया जाएगा जिसका भाजपा समर्थन करेगी." चुनाव लोकसभा और आने वाले महीनों में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति पर भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बै क में चर्चा की जाएगी.भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री रिपोर्ट पेश करेंगे. ख़ास कर गुजरात में विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में चल रही अंदरूनी उ ापटक केंद्र में होगा. भाजपा के उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने गुरुवार को कहा कि बै क में महँगाई, आतंकवाद, रामसेतु और आम आदमी पर बढ़ते दबाव के मुद्दों पर चर्चा होगी.भाजपा को मध्यावधि चुनावों की आहट भले ही सुनाई दे रही हो लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी किसको प्रधानमंत्री का दावेदार बनाएगी, इसको लेकर रस्साकशी जारी है. लोकसभा में विपक्ष के नेता आडवाणी ने यह कहकर कि ब्रिटेन में चुनाव में विपक्षी पार्टी के विजयी होने की सूरत में विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री बनाए जाने की परंपरा है, इस मामले में पहल कर दी. मगर उतनी ही तेज़ी से यशवंत सिन्हा और मुरली मनोहर जोशी ने यह कहकर उनका पत्ता काटने की कोशिश की कि यह बात भारत में लागू नहीं होती. |