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चाचा कलाम अमेरिका मे भारतियो के दिल पर छाये |
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डा. कलाम राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद अपनी पहली अमेरिका यात्रा में ही मिसाइलमैन ने भारतीयों का दिल जीत लिया। कलाम ने भरपूर तालियां बटोरीं। उन्होंने सफलता जैसे विषय पर भी बेहद साफगोई व सहज तरीके से अपनी बात रखी, जिसने सफल अमेरिकी भारतीयों के दिल को छू लिया। छोटे बच्चों की पढ़ाई को लेकर कई बातें कहीं। उनका खास जोर बच्चों को बेहतर तरीके से शिक्षित करने के गुर बताये ।
कलाम ने नए जमाने में काम करने और सफल होने का मंत्र देते हुए कहा, 'कभी समस्याओं को कैप्टन न बनाओ। खुद कैप्टन बनो और समस्याओं को हराओ।' भारतीय प्रोफेशनलों, उद्यमियों और टेक्नोक्रेटों की एक बड़ी सभा में कलाम ने एक सवाल के जरिए कई उत्तार दिए। उन्होंने पूछा, उन भारतीयों का क्या हुआ जिन्होंने अटलांटिक समुद्र को पार किया? इसका खुद ही जवाब देते हुए कलाम ने कहा- उन भारतीयों ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने अपने प्रोफाइल को बदल दिया, उन्होंने अपने सपने को बदल दिया, उन्होंने अपने काम करने के तरीके को बदल दिया। अंत में उन्होंने अपनी सफलताओं को भी बदला और इसी के साथ चैंपियनों के चैंपियन बन गए। कलाम की इस बात से भारतीय श्रोता गदगद हो गए। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कलाम ने कहा कि उन्होंने यही सवाल अपनी महिला मित्र सिस्को सिस्टम्स की सीईओ जान चैंबर्स से पूछा। तब उन्होंने इसके जवाब में कहा था कि अमेरिका हमेशा सर्वोत्ताम काम करने वालों को पूजता है और लोग विफलता से नहीं डरते। कलाम ने कहा कि जान चैंबर्स की इस बात से उन्हें अपने गुरु डा. सतीश धवन द्वारा कही गई एक बात याद आ गई। वे हमेशा कहते थे कि कभी समस्याओं को कैप्टन न बनाओ। खुद कैप्टन बनो और समस्याओं पर विजय पाओ। भारत के बारे में जिक्र करते हुए कलाम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कुलांचे भर रही है और 2020 तक भारत के विकसित देश बनने का सपना साकार होगा। पर यह विकसित भारत नैतिक मूल्यों की नींव पर बनेगा जो कि देश की परंपरा व विरासत में निहित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विकसित भारत में गांवों और शहरों के बीच की दूरी बेहद कम हो जाएगी और यह मात्र मामूली-सी होगी। कलाम ने जब कहा कि भारत दुनिया के सर्वश्रेष् विद्वानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के लिए सर्वोत्ताम िकाना है, तो उनकी इस बात पर भारतीय श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। Daink Jagran |