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श्री हामिद अंसारी

 

 

 
आडवानी ही बनेगे सारथी । वन मेन आर्मी ।सारथी E-mail
advaniसंघ परिवार को लगता है आडवानी कि जनता मे पकड आज भी उतनी ही है जितनी रामरथ यात्रा के समय थी । रामसेतु को सत्ता का सेतु बनाने मे केवल आडवानी मे ही दम है । भाजपा कहने को तो लोकतांत्रिक पार्टी है पर है वन मेन आर्मी , कई बडे चेहरे काँग्रेस के समान वगैर जमीनी पकड के है जिनके कंधे पर तमाम तरह की जिम्मेदरीयाँ है वो गुणा भाग करते रहते है दुसरी पंक्ती के नेताऔ को मौका मिलना चाहिये ,भोपाल मे शायद भाजपा मंथन करे या काँगेस की तरह रस्सम अदायगी ।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति का एजेंडा पूरी तरह चुनावी होगा। इसमें पार्टी अपने प्रमुख मुद्दे तो तय करेगी ही, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम चुनावी नेतृत्व की भी जमीन तैयार हो जाएगी। इसी बै क में बिना किसी औपचारिक घोषणा के यह संकेत भी मिल जाएंगे कि चुनाव की असली कमान किसके हाथ में रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर संघ परिवार चुनावी नेतृत्व पर छाए भ्रम को दूर करने का फैसला कर चुका है। रणनीति है कि बिना कोई औपचारिक एलान किए लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के नेता को आगे कर दिया जाए। राष्ट्रीय मुद्दों पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी का आगे आना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, शीर्षस्थ स्तर पर तय हो चुका है कि अगले चुनाव में भाजपा के सारथी आडवाणी होंगे।
संप्रग सरकार व वामदलों में उभरे मतभेदों के चलते जो चुनावी माहौल बना है, संघ नेतृत्व मान रहा है कि उसके मद्देनजर अब यह संदेश पार्टी काडर और जनता के बीच जाने का वक्त आ गया है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच यह संदेश पहले ही जा चुका है और पार्टी के बीच इसे प्रसारित करने पर काम शुरू हो चुका है। इस क्रम में भोपाल में होने वाली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति भी अहम पड़ाव होने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, परिवार का एक वर्ग तो मानता है कि अधिकृत रूप से इसकी घोषणा हो जाना ही श्रेयस्कर है। कार्यसमिति में भले ही ऐसा न हो, लेकिन चुनाव में आडवाणी की अगुवाई का संकेत जाना तय है। इसके साथ ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भोपाल में चुनावी मुद्दे और उन्हें उ ाने की पूरी रूप-रेखा तय कर लेगा। इस कड़ी में आंतरिक सुरक्षा और अमेरिका के साथ नाभिकीय करार पर तो पार्टी पहले ही तैयारी कर चुकी थी।
अब इन सबसे ऊपर मुद्दा रामसेतु का हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में राम के वजूद को नकार कर सरकार ने भाजपा को यह मुद्दा सौंपा है तो इस कार्यसमिति में अध्यक्षीय भाषण से लेकर प्रस्तावों तक में राम नाम की गूंज रहना तय है। सिर्फ असमंजस इस बात पर है कि इस विषय पर भाजपा आंदोलन का एलान किस तरह से करे। चूंकि, संघ ने रामसेतु मुद्दे पर आंदोलन का जिम्मा विहिप को सौंपा है और उसके नेता भाजपा के इसमें कूदने पर आपत्ति भी जता रहे हैं, ऐसे में भाजपा इस विषय में सोच-समझकर ही कदम आगे बढ़ा रही है।
विहिप महासचिव प्रवीण तोगड़िया नेसाफ कहा है कि रामसेतु का राजनीतिकरण नहीं होने दिया जाएगा। इस पर भाजपा महासचिव विनय कटियार ने 'राम केवल विहिप के नहीं हैं' कहकर साफ कर दिया कि पार्टी इस मुद्दे को उ ाएगी ही। यही नहीं, उन्होंने दो टूक कहा, 'मैं अपनी पार्टी से दुखी हूं कि यह मुद्दा जितनी आक्रामकता से उ ाना चाहिए था, उतना नहीं उ ाया गया। मैंने भाजपा अध्यक्ष से बात की है और राष्ट्रीय कार्यसमिति में भी आंदोलन छेड़ने का मुद्दा उ ाऊंगा।' इसके अलावा भाजपा सूत्र भी कह रहे हैं, 'आखिर राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा उ ेगा तो भाजपा कैसे जवाब नहीं देगी?' परिवार सूत्र मान रहे हैं कि अंतत: भाजपा को ही इस मुद्दे को उ ाना होगा।

 
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