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परामाणु समझौते - चीन को अलग-थलग करना नहीं' |
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सांसदजी , परमाणु और रामसेतु विवाद से दुर प्रणव दादा विदेश मे अपने काम मे मस्त है । दादा ने बोला की चीन को चिंचित होने की आवशकता नही
क्षिण कोरिया के दौरे पर गए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि बीजिंग को किसी भी रूप में घेरने का भारत का कोई इरादा नहीं है. साथ ही मुखर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते को लेकर उभरे मतभेदों के कारण अमेरिका के साथ रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मुखर्जी का कहना था कि भारत दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ हर स्तर पर सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत ने वर्षों पहले ‘पूर्व की ओर देखो' की नीति बनाई थी और इस पर वह आगे बढ़ रहा है. दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री सोंग मिन-सून के साथ मुलाक़ात के बाद मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के संग न (एनएसजी) के साथ होने वाली चर्चा में दक्षिण कोरिया का सहयोग मिलेगा. दक्षिण कोरिया एनएसजी के 45 देशों में शामिल है. दोनों देशों के बीच नौवहन समझौते और समग्र आर्थिक साझीदारी समझौते को इस साल के अंत तक अंतिम रूप देने पर सहमति बनी. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा, "वे असैनिक परमाणु ऊर्जा की हमारी ज़रूरतों से वाक़िफ़ हैं. जब भी यह मुद्दा एनएसजी में आएगा, हम उम्मीद करते हैं कि दक्षिण कोरिया इस पर सकारात्मक रूख़ अपनाएगा." news-bbc hindi |