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संसद को शर्मसार करने वाले सांसदजी, पर कार्यवाही क्यो नहीं - हाईकोट E-mail

संसद में सवाल पूछने के बदले रिश्वत लेने के मामले में सांसदों के खिलाफ किए गए स्टिंग ऑपरेशन मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला। कोर्ट ने स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने वाले दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामले पर सवाल उ ाया और कहा कि पुलिस ने पत्रकारों पर तो मामला दर्ज कर लिया मगर रिश्वत लेने के आरोपी सांसदों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचती रही। पत्रकारों द्वारा मामला खारिज किए जाने की अपील पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए यह टिप्पणी की

जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में भ्रष्टाचार को तो सह लिया जाता है मगर भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाता। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को सांसदों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए था, क्योंकि स्टिंग के आधार पर प्रथम दृष्टया रिश्वत लेने का मामला बनता था। महत्वपूर्ण है कि कोबरा डॉट कॉम के पत्रकार अनिरूद्ध बहल व अन्य ने 11 सांसदों को स्टिंग ऑपरेशन में कैद किया था। सांसदों को संसद में सवाल पूछने के बदले रुपये लेते दिखाया गया था।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की वकील मुक्ता गुप्ता ने कहा कि जब तक कोई शिकायत नहीं मिलती तब तक सांसदों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता था। उन्होंने उमा खुराना केस का हवाला देते हुए कहा कि स्टिंग के आधार पर उमा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया मगर बाद में यह स्टिंग फर्जी निकला। मगर कोर्ट ने इशारा किया कि गलत इरादे से किया गया स्टिंग और भ्रष्टाचार उजागर करने के मकसद से किए गए स्टिंग में फर्क होता है।
पुलिस की ओर से दलील दी गई कि राज्य सभा कमेटी की सिफारिश के आधार पर ही पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिश्वत लेने और देने के मामले में पुलिस ने एक पक्ष के खिलाफ ही कार्रवाई क्यों शुरू की। पुलिस जांच पर कोई रोक नहीं लगाता। पुलिस को सभी पक्षों को ध्यान में रखकर जांच करनी चाहिए थी। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों पर लोग मरते रहते हैं मगर पुलिस आंख बंद किए बै ी रहती है। पुलिस ने जब कहा कि इस स्टिंग मामले में शिकायत मिलने के बाद ही अलग से एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सिख विरोधी दंगों के दौरान पुलिस ने दो सौ लोगों की हत्या के मामले में केवल एक एफआईआर ही दर्ज की और अब पुलिस स्टिंग मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने की बात कर रही ह

 

 

 

 

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