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सरकारी प्यार से तकरार की शर्ते तय |
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वाम , काग्रेस = परमाणु मुद्दा दोनो के गले की हड्डी बना हुआ है, सरकारी हनीमून को खत्म हुये अभी कुछ दिन भी नही हुये कि सरकार और वाम दलो ने तकरार की शर्तो निशचित कर ली , आम जनता फिर मुर्ख बनी ,असहाय नजर आ रही . असल बात है कि दोनो बगैर माँगे भाजपा को कोई मुदा देना नही चाहते , सरकार गिरी नही कि ममता बंगाल मे , राजनाथ को देश मे हंगामा मचा देंगे । जिससे दोनो को नुकसान ज्यादा फायदा कम तो दोनो ने प्यार की शर्ते तय कर ली
बै क के बाद प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि बै क में फ़ैसला किया गया कि समझौते का विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी विचार किया जाएगा. इस बै क में वामपंथी दलों की ओर से प्रकाश कारत, सीताराम येचुरी, एबी बर्धन, डी राजा और देवव्रत बिस्वास मौजूद थे. कांग्रेस की ओर प्रणव मुखर्जी के अलावा एके एंटनी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सैफुद्दीन सोज़, पृथ्वीराज चौहान, आरजेडी के लालू प्रसाद यादव, डीएमके के टीआर बालू और एनसीपी के शरद पवार उपस्थित थे. बै क के बाद सीपीआई महासचिव एबी बर्धन से ये पूछे जाने पर कि क्या कोई विशेषज्ञों को अगली बै क के लिए बुलाया जाएगा, तो उनका जवाब था कि किसी विशेषज्ञ की ज़रूरत नहीं है. वाम दलों का कहना है कि जब तक उनकी चिंताओं का निराकरण नहीं हो जाता और समिति अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती तब तक भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत स्थगित कर देनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख अनिल काकोदकर विएना जा रहे हैं जहाँ वो आईएईए की बै क में हिस्सा लेंगे. | | |