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सांसदो की हटधर्मिता के चलते संसद समय से पहले स्थगित |
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देश के लगभग ४० करोड् रुपये बेबजय संसद पर खर्च हुये । इन सब की होली सभी सांसदो ने मिल कर खेली, जे केवल आँकडा है हकीकत से कौसो दुर । कारार पर कतार की टकरार ही हो सकी . नये बने मुखिया कुछ भी नही कर सके . जनता जे सब देखने के अलावा कुछ नही कर सकी । शांति का मसीहा देखते रहा ? बस खामोश ।
संसद के दोनों सदन, लोकसभा और राज्यसभा सोमवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। भारत-अमेरिकी परमाणु करार मुद्दे पर जेपीसी के ग न की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंच रही थी। इस बाबत कोई समाधान न निकलने के कारण समय से पहले संसद का सत्रावसान करना पड़ा।
पहल से तय कार्यक्रम के मुताबिक मॉनसून सत्र 14 सितंबर तक चलना था। 10 अगस्त को शुरू हुए इस सत्र में अमेरिका के साथ हुए असैनिक परमाणु समझौते पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू से ही टकराव बना हुआ था। यहां तक कि सरकार लेफ्ट पार्टियों का विरोध भी झेल रही थी। आखिरकार लेफ्ट के दबाव में सरकार ने समझौते के विभिन्न मुद्दों पर विचार करने के लिए यूपीए और लेफ्ट की एक साझा समिति ग ित की, जिस पर विपक्ष खासा नाराज है। उसका कहना है कि यह एक दूरगामी समझौता है। इसके मद्देनजर इस मसले पर विचार करने के लिए संयुक्त संसदीय कमिटी (जेपीसी) ग ित जानी चाहिए।
हालांकि सरकार ने जेपीसी की मांग खारिज कर दी है, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। संसद में पिछले कई दिनों से चल रहे विपक्ष के हंगामे के बीच ही कई विधायी कार्य भी निपटा दिए गए।
राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद सदन के सुचारु रूप से नहीं चल पाने की वजह से इसे समय से पहले स्थगित किया जा रहा है। यहां तक कि राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले सदन की कार्यवाही का ब्यौरा देने वाला सभापति का भाषण और प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता के रस्मी भाषण भी नहीं हुए। सत्रावसान से पहले सभापति ने सदन की ओर से राज्यसभा के महासचिव योगेनद्र नारायण को भावभीनी विदाई दी। वह 14 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। |