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भाजपा में आडवानीजी की पौ बारह , बाँस होगे |
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संघ की भाजपा मे बहारी रुप से दखंलदाजी अब कम होगी,भाजपा मे अपने प्रतिनिधि को भी वापस बुलाया जा सकता है , संघ का सोचना है कि उसके स्वयंसेवक , सीधे तौर पर राजनिति में आने से संघ की विचारधारा से विमुख हो जाते है, खैर तर्क कुछ भी , संघ के इस कदम से आडवानीजी की तागत में भारी इजाफा होगा शायद वो भाजपा के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर चुनाव में चुनाव प्रचार करे ?
मुंबई में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बै क में संघ और बीजेपी के बीच रिश्तों पर गहन विचार हुआ। प्रबल संभावना है कि संघ में बीजेपी के प्रभारी का पद खत्म कर दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी में आडवाणी मजबूत होंगे। संघ की चार दिन की बै क रविवार को खत्म हो रही है। बै क में बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज सहित अन्य कई बड़े नेता हिस्सा ले रहे हैं।
इस बै क के बाद प्रधानमंत्री के उम्मीदवार का कोई संकेत मिले या न मिले, इतना जरूर तय हो जाएगा कि लोकसभा के संभावित मध्यावधि चुनाव के मद्देनजर अहम फैसले लेने में आडवाणी की कितनी चलेगी। बीजेपी हलकों में शनिवार को यह चर्चा रही कि बै क में संघ में बीजेपी के प्रभारी का पद खत्म किए जाने का फैसला लिया जा चुका है। संघ और बीजेपी के बीच पुल का काम करने वाले इस पद पर अभी सुरेश सोनी हैं। उनके पहले यह काम मदन दास देवी के जिम्मे था। सूत्रों के अनुसार, बै क में बीजेपी के एक पदाधिकारी को हटाने का फैसला भी लिया जा सकता है। संघ को इस पदाधिकारी के खिलाफ आचरण की शिकायतें मिली हैं।
सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं माना जा सकता कि संभावित फैसले के बाद बीजेपी पर संघ का अंकुश ढीला हो जाएगा। संघ ने अपने को पार्टी के लिए नीतिगत फैसलों तक ही सीमित रखने का फैसला लिया है। बै क में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह चारों दिन की शिरकत चारों दिन की है। आडवाणी ने सिर्फ शनिवार की बै क में हिस्सा लिया। जो फैसला सबसे अहम होगा, वह है लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका। सूत्रों की मानें तो आगामी चुनाव को देखते हुए आडवाणी की भूमिका बढ़ने वाली है। अब आडवाणी पार्टी मुख्यालय में अधिक से अधिक समय बिताएंगे।
शुक्रवार को पार्टी के सीनियर नेता यशवंत सिन्हा के एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू से पार्टी में आडवाणी के कद को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा था कि आडवाणी पीएम के स्वाभाविक उम्मीदवार नहीं हैं। पार्टी में इस पद पर आसीन होने वाले कई नेता हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि पीएम चाहे कोई बने, पूरी पार्टी को एक साथ ले चलने की क्षमता आडवाणी के अलावा और किसी में नहीं है। News- Navbharttimes |