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चलो फिर गले मिले दिल तो मिल नही सकते |
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कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं के बीच प्रधानमंत्री निवास पर हुई एक बै क में मजबुरी के चलते फिर सरकार चलाने की कबायत करने पर दोंनो ने सहमति जताई , क्या करे अब कांग्रेस भी कहने को मजबुर कि मजबुरी का नाम महात्मा ?
भारत और अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते पर अपने रुख को नरम करते हुए सरकार ने गुरुवार को उस पर अमल करने की प्रक्रिया को उस वक्त तक टाल दिया जब तक की समझौते के खिलाफ वाम दलों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए ग ित की जाने वाली समिति अपने निष्कर्ष नहीं दे देती।
कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं के बीच प्रधानमंत्री निवास पर हुई एक बै क के बाद विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने एक बयान पढ़ा जिसमें कहा गया कि समझौते पर अमल करने की प्रक्रिया तय करने में समिति के निष्कर्षों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही इस करार को लेकर कांग्रेस और वाम दलों के बीच पिछले तीन सप्ताह से चला आ रहा टकराव समाप्त हो गया।
आज की बै क में यह भी तय किया गया कि समिति का ग न जल्दी ही किया जाएगा और इस में कौन-कौन से सदस्य होंगे, इसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। बयान मे कहा गया कि समिति बनाने का निर्णय समझौते के खिलाफ वाम दलों की आपत्तियों के मद्देनजर किया गया है।
तीस मिनट तक चली इस बै क के बारे में मुखर्जी ने किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। हालाँकि वाम दलों के नेताओं ने कहा कि बयान में यह बात साफ है कि समझौते पर अमल करने की प्रक्रिया पर तब तक काम नहीं होगा जब तक कि समिति अपने निष्कर्षों पर नहीं पहुँच जाती।
जब से भारत और अमेरिका के बीच हुये 123 समझौते का विवरण मिला है वाम दल मांग कर रहे हैं कि इस पर अमल की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए और सरकार कहती रही है कि इय मामले पर वापस जाना संभव नहीं है।
दोनों पक्षों के बीच बात उस वक्त और बिगड़ गई जब प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने वाम दलों को चुनौती दे डाली कि वे चाहें तो सरकार से अपना सर्मथन वापस ले सकते हैं और वाम दलों ने कहा कि अगर सरकार ने समझौते पर आगे काम किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। news- webdunia.pic ndtv |