भारत का नया नाम गेंद , आम जनता की किसको परवाह , नेताओ के पास जनरेटर है , और भी साधन , अब वाम अपने पाले में से कांग्रेस के पाले में गेंद डाल रही है , आडवानी मैच देख रहे कि कब गोल हो , जनता पेनडुलम है,देश लटकी गेंद
भारत का नया नाम गेंद , प्रथमः वाम दलो को सुने , माकपा के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु ने कहा है कि केंद्र की संप्रग सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी कि नहीं यह अब काफी हद तक कांग्रेस के रुख पर निर्भर करता है। शुक्रवार को पार्टी के राज्य सचिव मंडल की बै क में भाग लेने के बाद श्री बसु स्पष्ट तौर पर कहा कि माकपा केंद्रीय कमेटी ने परमाणु करार का विरोध करने के अपने निर्णय से सरकार को अवगत करा दिया है। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है। दिल्ली में माकपा केंद्रीय कमेटी की बै क के बाद परमाणु करार पर पार्टी का रुख साफ है। समर्थन वापसी से पीछे हटने के बारे में पूछने पर श्री बसु ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। इस मुद्दे पर पार्टी पीछे नहीं हटी है। सरकार से कहा गया है कि वह परमाणु करार को लागू करने पर आगे न बढ़े। सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला। पार्टी इस मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रही है। सरकार का रुख जानने के बाद पार्टी अगली रणनीति तक करेगी। श्री बसु ने कहा कि हाइड एक्ट क्या है, इस बारे में वह कुछ नहीं जानते है। परमाणु समझौता में क्या-क्या है, इस बारे में भी सरकार की ओर से स्पष्ट कुछ नहीं बताया गया है। सरकार को इस बारे में सभी तथ्यों का खुलासा करना होगा।
कांग्रेस ः की कहानी मनमोहन सिंह का कहना है कि भारत सामरिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा केंद्र में कांग्रेस पार्टी की अगुआई वाली यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल इस समझौते को पहले ही ुकरा चुके हैं. वामपंथी दलों के लगातार विरोध के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का लहज़ा भी थोड़ा तल्ख़ हुआ और पिछले दिनों उन्होंने एक अंग्रेज़ी दैनिक को दिए इंटरव्यू में ये कह दिया, "अब परमाणु समझौते पर दोबारा बातचीत की गुंजाइश नहीं है. अगर वामपंथी दल समर्थन वापस लेना चाहते हैं, तो ले लें." भाजपा की कहानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग बंधन (एनडीए) का आरोप है कि समझौते से परमाणु परीक्षण का अधिकार छिन गया है और यह भारत की संप्रभुता को गिरवी रख कर किया गया है |