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करात बहुत बोलता है भाई, सरकार या करार E-mail

karat मनमोहनजी की समस्या कम नहीं हो रही है,करार मुद्दे पर टस से मस न होते हुए आज मार्क्सवादी , वेखोब नजर आये ,पर नरम भी पडे,

पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहती कि मौजूदा संकट का असर केंद्र के यूपीए ग बंधन पर पड़े लेकिन जब समझौते को अमली जामा पहनाने की जिद होगी तो इसका सारा दारोमदार सरकार पर निर्भर करेगा।
केंद्रीय समिति की दो दिन तक चली बै क के बाद पहली बार माकपा ने स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे पर बने गतिरोध से सरकार का भविष्य बाधित हो, जिसका वह बाहर से समर्थन दे रही है। बै क में पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है, ‘यघपि सरकार चले, यह इस पर निर्भर करता है कि वह परमाणु करार को लागू करने की दिशा में कोई पहल न करे। इसलिए केंद्रीय समिति करार पर सरकार का अमल रोकना सुनिश्चित करने के लिए पोलित ब्यूरो को अधिकृत करती है।’ बै क के बाद यह जानकारी देते हुए माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने कहा, ‘इसके बावजूद समझौते को लागू करने की दिशा में कदम उ ाया जाता है तो सरकार के न चलने की जवाबदेही खुद उसीकी होगी।’

रवैया

हालांकि करात का रवैया उतना कड़ा नहीं दिखा और साफ़ लग रहा था कि वामपंथी दल फ़िलहाल सरकार गिराने के पक्ष में नहीं है.

हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर सरकार इस संधि को लेकर आगे कोई भी क़दम उ ाती है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

यह पूछे जाने पर कि सरकार की ओर से वाम दलों की चिंताओं पर चर्चा के लिए प्रस्तावित व्यवस्था के बारे में उनका क्या कहना है तो करात ने कहा कि ऐसी किसी भी व्यवस्था का वो स्वागत करते है जो इस संधि की आगे की प्रक्रिया को रोकती हो.

विशेषज्ञों का कहना है कि वाम दल फ़िलहाल सरकार गिराने के पक्ष में नहीं है लेकिन वो ये भी नहीं चाहते कि परमाणु संधि पर उनका विरोध कम हो.

कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दक्षिण अफ्रीका की अपनी यात्रा को बीच में ही छोड़कर गुरुवार की रात वापस आ रही हैं.

उम्मीद है कि उनके लौटने के बाद दोनों दलों के बीच कोई बातचीत हो जिससे इस पूरे विवाद के निपटारे का कोई रास्ता निकल सके.

 

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