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सांसदजी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 'एक मुलाक़ात' बी.बी.सी हिन्दी के साथ E-mail

 Joytiraditya sindhia

भारतीय राजनीति के सबसे पुराने परिवारों में से एक हैं. वो जवान और ख़ूबसूरत लोकसभा  सांसद के रूप में जाने जाते हैं. उनके पहनावे की भी बहुत तारीफ़ होती है. एक मुलाक़ात में हमारे आज के मेहमान हैं ग्वालियर राजपरिवार के सांसदजी ज्योतिरादित्य सिंधिया.की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं के साथ

ये बताइए जब आपकी तारीफ़ में इतना कुछ कहा जाता है जैसा कि मैंने अभी कहा तो आपको अज़ीब नहीं लगता?

बिल्कुल लगता है. अच्छा हुआ यहाँ कैमरा नहीं है. मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था.

मैं आपके पिता के साथ ग्वालियर गया हूँ. सच में मालूम पड़ता है कि कितने ख़ास हैं आप लोग उस क्षेत्र के लिए. लगता है कि जैसे वो राजशाही का समय ख़त्म ही नहीं हुआ है. कभी आपको ख़ुद भी अहसास होता होगा?

नहीं मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ. आज हम लोकतांत्रिक भारत में रह रहे हैं. और जैसा आप कह रहे हैं वो पुराने समय की बातें है. हाँ ये बात ज़रूर है कि मेरे पूज्य पिता और दादी जी ने क्षेत्र की जनता के साथ एक आत्मीय संबंध स्थापित किया है. ये संबंध दिल का है.

मेरे पिता जी के बारे में कहा जाता था कि वो दिमाग से नहीं दिल से निर्णय लेते थे. ये परंपरा या धरोहर उन्हें क्षेत्र की जनता के साथ बनाए संबंधों की वजह से मिली थी. मैं भी उसी परंपरा का पालन कर रहा हूँ.

 आज हम लोकतांत्रिक भारत में रह रहे हैं. और जैसा आप कह रहे हैं वो पुराने समय की बातें है. हाँ ये बात ज़रूर है कि मेरे पूज्य पिता और दादी जी ने क्षेत्र की जनता के साथ एक आत्मीय संबंध स्थापित किया है. ये संबंध दिल का है

 

मेरा इशारा किसी सामंती परंपरा की तरफ नहीं था. मेरे कहने का मतलब तो सिर्फ़ इतना था कि आज भी लोगों के बीच इतनी लोकप्रियता कम ही देखने को मिलती है?

लोग कभी ये कहते होंगे कि मुँह में चाँदी का चम्मच लेकर पैदा हुए. आपको कुछ संघर्ष नहीं करना पड़ा. ऐसा सुनकर ख़राब नहीं लगता.

हाँ मैं बड़े घर में पैदा हुआ लेकिन ये भी देखने की बात है कि मेरे पिता जी ने कितना संघर्ष किया. उसी तरीके का पालन-पोषण मुझे और मेरी बहन को भी मिला. एक किस्सा मैं आपको बताता हूँ. मेरी स्कूल की पढ़ाई-लिखाई दून स्कूल से हुई थी. हम स्कूल की तरफ से छुट्टियों में सरिस्का जा रहे थे. हमारी कुछ गाड़ियाँ भी वहाँ थीं. मैं अपने ट्यूटर से पूछकर अपने कुछ दोस्तों के साथ गाड़ियों में सवार हो गया. गाड़ी से दिल्ली आया. घर पर दोस्तों के साथ खाना खाया ही था कि पिता जी का रेल भवन से फ़ोन आ गया. मैंने ही फ़ोन उ ाया. उन्होंने पूछ लिया कि तुम यहाँ क्या कर रहे हो. मेरी माँ से उन्होंने तुरंत कहा कि इन लोगों को आईएसबीटी बस अड्डे भेजो वहाँ से ये बस से सरिस्का जाएंगे.

इतनी अच्छी हिंदी बोलना कहाँ से सीखा?

उत्तर प्रदेश से. इसका श्रेय मैं दून स्कूल को भी दूँगा. तब उत्तरंचल नहीं बना था. मैं पिता जी के चुनावी अभियानों में जाया करता था. उस दौरान भी हिंदी जानने-समझने का मौका मिला.

क्या बचपन में आपको एक राजकुमार की तैयार किया जाता था. बंदूक, घुड़सवारी और दूसरों से बात करने का सलीका आदि सब कुछ सिखाया जाता था?

हमें कड़े अनुशासन में रखा जाता था. जैसे सभी घरों में बड़ों की इज़्ज़त करना सिखाया जाता है वैसे ही हमें भी सिखाया गया. पिता जी को ख़ुद खेलों में रुचि थी तो हमें भी हर तरह के खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

वसुंधरा राजे सिंधिया
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ज्योतिरादित्य की बुआ हैं

आप अपनी पसंद का एक गाना बताइए?

कल हो न हो फ़िल्म का गाना. मेरे बच्चे ने मुझे ये फ़िल्म देखने को कहा. बढ़िया फ़िल्म है.

बचपन की कोई ऐसी घटना जो आप को अब भी याद है. जो बहुत ख़ास हो?

मैंने पिता जी के साथ जंगलों की बहुत सैर की. हम लोग शिकार पर जाते थे. रोमांच भरी ज़िदंगी बहुत पंसद आती थी. प्रकृति को जानने की एक जिज्ञासा भी वहीं से पैदा हुई. बहुत छोटी उम्र में हम लोग शिवपुरी के जंगलों में जाया करते थे. एक बार हम लोग शिवपुरी के जंगल में थे. पिता जी ने जीप बंद कर दी. गाड़ी की लाइटें भी बुझा दीं और हम लोगों से कहा कि जंगल में जाओ और जब तक मेरी आवाज़ न आए तब तक चलते रहो. मैं तो डर गया. लेकिन इसकी वजह से ये पता लगा कि अनजाने माहौल में कैसे रहा जाता है. हम लोग का बचपन बहुत मस्ती भरा रहा.

अच्छा जो कुछ भी चाहिए होता था वो सब आसानी से मिल जाता था?

मेरे पिता जी अगर एक तरफ कड़े और अनुशासन प्रिय थे तो दूसरी तरफ हम लोग के अच्छे प्रदर्शन पर मांगने पर कुछ भी लाकर दे देते थे. प्यार और अनुशासन के बीच एक बहुत ही बेहतर संतुलन था.

तो कैसा प्रदर्शन रहता था पढ़ाई-लिखाई में?

मेरा प्रदर्शन ीक ही रहता था. लेकिन जब स्कूल से शिकायतें आती थीं तो बस गए काम से. मैं पहले बॉंम्बे के कैंपियन स्कूल में पढ़ता था फिर दून स्कूल गया और उसके बाद विदेश पढ़ने गया.

दून स्कूल में ऐसी क्या ख़ास बात है कि वहाँ से इतने बड़े-बड़े लोग पढ़कर निकले और नाम किया. स्कूल में कुछ ख़ास है या बड़े परिवार की वजह से ऐसा होता है?

उस स्कूल के वातावरण में कुछ ख़ास बात है. मैं ऐसा नहीं कहूँगा कि बस दून स्कूल ही ऐसा है. इस देश में तीन-चार स्कूल ऐसे हैं जिनका वातावरण बेहतरीन है. इन स्कूलों में 600 बच्चों के बीच बहुत ही छोटी उम्र में अपने आपको बेहतरीन बनाने के सारे मौके मिलते हैं. कुछ चुनौतियाँ भी मिलतीं है. अगर इतनी कम उम्र में आपको ऐसे अवसर और चुनौतियाँ मिल रही हों तो आप अपने को भविष्य के लिए तैयार कर पाओगे. बोर्डिंग से पढ़ा एक बच्चा नए वातावरण में तेज़ी से घुल-मिल जाता है. उसके हिसाब से अपने को तैयार कर लेता है.

और स्कूल में शैतानियाँ करते थे?

वो सब तो चलता ही रहता था. शैतानियों की वजह से सज़ा मिला करती थी.

सबसे भयंकर शैतानी पर सबसे कड़ी सज़ा?

ब्रेकिंग बाउंस सबसे बड़ी शैतानी होती थी. जिसमें हम स्कूल से गोला मारकर बाहर घूमने और खाना खाने जाते थे.

 जिस तरह की परवरिश का तरीका और दोस्ताना रवैया मेरे पिता जी ने रखा वो बहुत बढ़िया था. अपनी परवरिश के दौरान जो मुझे ख़ास बात नज़र आई वो ये थी वो हमारे साथ बिताए समय की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देते थे बनिस्बत इसके कि कितना अधिक समय उन्होंने हमारे साथ गुज़ारा. कुछ बातों से वो कभी समझौता नहीं करते थे. वो हमें साल में एक बार ज़रूर घुमाने ले जाते थे. शाम का खाना साथ खाते थे. दिनचर्या में भी वो हमारे साथ एक-आधे घंटे ज़रूर बिताते थे. अगर इतना सब कुछ मैं अपने बच्चे के साथ कर सका तो बढ़िया होगा

 

स्कूल के बाद?

स्कूल के बाद विश्वविद्यालय गया. पिता जी चाहते थे कि मैं इंग्लैंड जाऊँ लेकिन मैं अमरीका जाना चाहता था. मैंने हार्वर्ड से स्नातक किया. उसके बाद नौकरी की और फिर स्टैनफ़ोर्ड से बिजनेस की पढ़ाई की.

हार्वर्ड में दाख़िला मुश्किल से हुआ होगा?

वहाँ आपके शैक्षिक प्रदर्शन के साथ-साथ रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा होती है. साथ ही प्रार्थी के लिखने की कला और निबंध पर भी ध्यान दिया जाता था. प्रार्थी भी इन्हीं चीज़ों पर ध्यान दिया करता था.

आपकी पसंद का एक और गाना?

एक ग्रुप है ‘जल’ नाम से. उसका एक गाना है लम्हे.

एक और गाना?

‘डॉन’ का एक गाना है आज की रात...

आप ने यहाँ भी पढ़ाई की और विदेश में भी. दोनों जगहों में क्या अंतर पाया?

भारत में हमें पढ़ाया जाता है कि आपका क्या सोचना है, आपका विचार क्या होना चाहिए. अमरीका में पढ़ाया जाता है कि कैसे सोचना है, कैसे विश्लेषण करना चाहिए.

फिर बाहर आपने एक बैंकर की नौकरी की?

मुझे लगा कि घर लौटने से पहले मुझे नौकरी करनी चाहिए. इसलिए मैंने नौकरी की. हार्वर्ड में ही कैंपस से मैंने साक्षात्कार दिया और नौकरी शुरू की. पहले न्यूयॉर्क और फिर हाँगकाँग और फिर बॉंम्बे.

अमरीका में कुल कितने साल बिताए?

अमरीका में साढ़े सात साल रहा.

अमरीका में रहने के दौरान सबसे ज़्यादा फ़र्क क्या महससू करते थे. क्या कुछ मिस करते थे?

मैं हर पांच-छह महीने पर घर आता था. क्षेत्र के लोगों के बीच रहता था. अगर बड़े स्तर पर फ़र्क की बात करें तो वो ज़िंदगी की रफ़्तार का था. वैसा आज नहीं है.

चाहे जहाँ भी रह रहे हों या पढ़ रहे हों लेकिन ये पता रहा होगा कि राजनीति में तो जाना ही है?

नहीं. मेरे पिता जी ने मुझसे कहा था कि तुम अपनी ज़िंदगी में कुछ भी करो लेकिन ग्वालियर क्षेत्र के लिए तुम्हें कुछ योगदान करना होगा. चाहे तुम व्यवसाय करो, राजनीति करो या समाज सेवा ये तुम्हें तय करना है.

अपनी पसंद का एक और गाना बताएं?

‘कभी अलविदा न कहना’ का मितवा....

अपनी पत्नी प्रियदर्शिनी से आपकी मुलाक़ात सबसे पहले कब हुई?

सबसे पहले मैं उनसे मुंबई में मिला. मैं हार्वर्ड से लौटा था. रात के खाने पर मेरा और उनका परिवार मुंबई में मिला. मेरी और प्रियदर्शिनी की बातचीत हुई. आगे का फ़ैसला हम दोनों पर छोड़ दिया गया. तीन साल बाद 1994 के नवबंर महीने में हमारी शादी हुई. हम मिलते रहे, बातचीत करते रहे.

क्या वो पहली नज़र का प्यार था या लगा कि चलो माँ-बाप चाहते हैं तो शादी कर लेते हैं?

मुझे पहली बार मिलकर ही कुछ-कुछ लगा था.

क्या घंटियाँ बजने लगी थीं?

बिल्कुल. दर्जनों घंटियाँ बजने लगी थीं. प्रियदर्शिनी में परंपरा और आधुनिकता का समन्वय है जो हमारे के लिए बहुत ज़रूरी था. दोनों बातें हुईं.

एक तरफ समझदारी भरा निर्णय था और दूसरी तरफ एक नासमझी भरा प्यार?

कह सकते हैं कि दोनों ही था.

तो वो जो नासमझी भरा प्यार करने का फ़ैसला था उसके बारे में कुछ बताएं?

मेरे ख़याल से संकेत दोनों तरफ से था. कैमस्ट्री की बात थी.

यानी जब डिनर ख़त्म हुआ तो आपने तय कर लिया कि यहाँ बात बढ़ानी है?

बिल्कुल.

आपने अपनी मम्मी-पापा से कुछ नहीं कहा?

नहीं. उस समय नहीं बताया. संबंधों में मैच्योरिटी बहुत ज़रूरी होता है. हम लोगों ने जब ख़ुद निर्णय ले लिया उसके छह-आ महीने बाद अपने घर वालों को सूचित कर दिया था.

किसी रिश्ते के सफल संचालन पर आप क्या कहना चाहेंगे?

रिश्ते की नींव गहरी होनी चाहिए. एक दूसरे का ध्यान रखना चाहिए. एक दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए.

क्या ये आपका पहला प्यार था. या इससे पहले भी आप प्यार में पड़ चुके थे. चाहे एक तरफा प्यार ही हुआ हो?

हाँ, पहले भी प्यार कर चुका हूँ.

एक बार या उससे अधिक?

अब मैं नंबर तो आपको नहीं बता सकता.

अच्छा इतना बता दीजिए कि ये सिंगल डिज़िट में था डबल डिज़िट में था?

सिंगल डिज़िट.

तो क्या एक तरफा प्यार ही था या आपने इज़हार किया लेकिन बात कुछ बात बनी नहीं?

हाँ ऐसा ही हुआ था.

आप एक पिता के रूप में अपने आपको कैसे देखते हैं. एक अच्छे पिता के रूप में या अपने पिता की तरह ख़ुद को देखते हैं?

जिस तरह की परवरिश का तरीका और दोस्ताना रवैया मेरे पिता जी ने रखा वो बहुत बढ़िया था. अपनी परवरिश के दौरान जो मुझे ख़ास बात नज़र आई वो ये थी वो हमारे साथ बिताए समय की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देते थे बनिस्बत इसके कि कितना अधिक समय उन्होंने हमारे साथ गुज़ारा. कुछ बातों से वो कभी समझौता नहीं करते थे. वो हमें साल में एक बार ज़रूर घुमाने ले जाते थे. शाम का खाना साथ खाते थे. दिनचर्या में भी वो हमारे साथ एक-आधे घंटे ज़रूर बिताते थे. अगर इतना सब कुछ मैं अपने बच्चे के साथ कर सका तो बढ़िया होगा. लेकिन एक बात आपको बताऊँ कि जनसेवा को अगर आप अपना लक्ष्य बनाते हैं तो समय नहीं मिलता. आप सिर्फ़ अपने नहीं बल्कि सभी के हो जाते हो. आपकी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. मेरे पिता जी कहते थे कि कोई भी चीज़ जिसे व्यक्ति जीवन में महत्वपूर्ण समझेगा उसके लिए समय ज़रूर निकालेगा. मुझे अभी अपने टाइम मैनेजमेंट पर और काम करना है.

बच्चे कितने हैं?

मेरे दो बच्चे हैं लड़के का नाम आर्यमन है जो 12 साल का है और लड़की अनन्या चार साल की है. दोनों यहीं दिल्ली में पढ़ रहे हैं.

जब हम ग्वालियर जाते हैं तो लगता है कितना पीछे आ गए हैं. ऐसा लगता है कि जैसे सबकुछ फ़्लैशबैक में चला गया है. आप चाहे इसे जनसेवा कहें लेकिन लोग तो महाराज ही मानते हैं?

मैं आपसे सहमत नहीं हूँ. अगर ग्वालियर क्षेत्र की जनता को मोहब्बत, लगाव और प्यार था तो ग्वालियर के महाराज से नहीं था बल्कि माधवराव सिंधिया के साथ था.

और जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

अगर ग्वालियर क्षेत्र की जनता के दिल में मैं थोड़ी सी जगह भी बना लूँ तो मैं अपने जीवन को सफल समझूंगा.

आपकी पसंद का एक गाना बताइए?

‘बॉर्डर’ फ़िल्म का गाना है संदेशे आते हैं....

एक और गाना?

एआर रहमान का गाना वंदे मातरम्...

रहमान पसंद हैं?

मैंने ये गाना बहुत बार सुना है. उनकी एक स्टाइल है. ये गाना उनकी शैली का ही एक प्रमाण है.

आप अपने पिता का नाम लिए बिना बताएं कि और कौन सा व्यक्तित्व है जिसने आपको प्रभावित किया है?

अलग-अलग देशों में जो नेतृत्व उभरा है जिसने अपने देश में बड़ा परिवर्तन लाया है. जिसने अपने देश के ग़रीब के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है मुझे उन सबका व्यक्तित्व प्रभावित करता है. चाहे वो राजीव गांधी हों, बिल क्लिंटन हों, टोनी ब्लेयर हों, गोर्वाचोव हों या नेल्सन मंडेला हों. सिर्फ़ राजनीति क्षेत्र में नहीं आप देखिए दूसरे अन्य क्षेत्रों जैसे खेल और व्यापार के क्षेत्र में ऐसे कई लोग हैं जो अच्छा कर रहे हैं. आज के समय कई लोग ऐसे हैं जो बेहतर कर रहे हैं और आदर्श बन रहे हैं.

आपके बारे में भी ऐसी संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं?

मैं तो इसे मज़ाक समझूंगा. आप आर्यमन को बोलेंगे वो तो हँसने लगेगा.

 हमारे देश में अपार क्षमता है. भारत में आर्थिक ताकत के रूप में उभरने और आध्यात्मिक ताकत के रूप में उभरने की अपार क्षमता है. स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक आध्यात्मिक ताकत बनाने का सपना देखा था. भारत में आर्थिक और आध्यात्मिक शक्ति के समन्वय के रूप में उभरने की अभूतपूर्व क्षमता है.

 

आपका भारत के बारे में क्या दृष्टिकोण है?

हमारे देश में अपार क्षमता है. भारत में आर्थिक ताकत के रूप में उभरने और आध्यात्मिक ताकत के रूप में उभरने की अपार क्षमता है. स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक आध्यात्मिक ताकत बनाने का सपना देखा था. भारत में आर्थिक और आध्यात्मिक शक्ति के समन्वय के रूप में उभरने की अभूतपूर्व क्षमता है. यही एक महान देश के निर्माण की नींव बनना चाहिए. मुझे लगता है कि हमारे देश में ये सारी क्षमताएं मौज़ूद हैं. ज़रूरत है बस उसे उजागर करने की. इस देश को कोई और रोक नहीं पाएगा. अगर कोई रोकेगा तो हम ही रोक पाएंगे. हमें समाज के सभी अंगों के विकास के लिए मिल कर काम करना चाहिए.

कार रेसिंग की है आपने?

गाड़ियों का बहुत शौक था और रेसिंग का भी. लेकिन समय के साथ व्यक्ति बदलता है. ज़िम्मेदारी न होने पर ज़िंदगी आराम से गुज़रती है. लेकिन जब समय के साथ ज़िम्मेदारी आती है तो आप सिर्फ़ अपने लिए नहीं जीते. अपने परिवार, समाज और क्षेत्र की ज़िम्मेदारी भी आपके ऊपर आ जाती है और आप परिपक्व हो जाते हैं.

जब गाड़ी चलाते थे तो कितनी स्पीड पर चला लेते थे?

ये मत पूछिए.

फिर भी?

विदेश में काफ़ी स्पीड पर चलाते थे.

कौन सी कार पसंद है?

किसी भी नौजवान से पूछें आपको वही पुराने उत्तर मिलेंगे.

हर नौजवान से ये सुनने को नहीं मिलेगा.

आप आर्यमन से पूछिए वो भी फ़रारी, लोटस और पॉश ही का नाम लेगा. हम लोग अपने कमरों में कारों के पोस्टर लगाया करते थे. वैसे मुझे जीप पसंद है.

और कोई रुचि या शौक?

किताबें पढ़ने का शौक है. क्रिकेट, तैराकी और बैडमिंटन खेलता हूँ. अगर अधिक समय मिलता है तो स्नूकर और बिलियर्ड्स भी खेलता हूँ.

किस तरह की किताबें पसंद हैं?

सामान्य तौर पर ऐतिहासिक और राजनीतिक विषयों की किताबें पसंद है.

कौन सा ऐतिहासिक काल पसंद है. जैसे मैं कहूँगा कि मुझे नेपोलियन और बिस्मार्क पसंद है?

ऐसा कुछ तय नहीं है. आधुनिक समय की ही किताबें पसंद है. पुतिन पर एक किताब निकली थी ‘क्रेमलिन राइज़िंग’ और माओ पर एक किताब निकली थी वो पढ़ी थी. बहुत रचनात्मक थी.

अभी कुछ दिन पहले ही हमने इसी कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला का साक्षात्कार किया था. वो ख़ुद बहुत बेहतरीन स्टाइल से रहते हैं. मैं उनसे पूछा कि संसद में सबसे अच्छे तरीके से कपड़े पहनने वाला आदमी कौन है?
उन्होंने बिना किसी संशय में पड़ते हुए आपका नाम लिया. क्या आपको ऐसा लगता है कि आप बेहतरीन तरीके से कपड़े पहनते हैं और चश्मे लगाते हैं?

चश्मों का शौक तो है मुझे. लेकिन कपड़े तो वही हैं. वही खादी का कुर्ता-पैजामा. और वही जैकेट.

 जनसेवा को अगर आप अपना लक्ष्य बनाते हैं तो समय नहीं मिलता. आप सिर्फ़ अपने नहीं बल्कि सभी के हो जाते हो. आपकी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. मेरे पिता जी कहते थे कि कोई भी चीज़ जिसे व्यक्ति जीवन में महत्वपूर्ण समझेगा उसके लिए समय ज़रूर निकालेगा. मुझे अभी अपने टाइम मैनेजमेंट पर और काम करना है

 

लेकिन इसमें कुछ तो ख़ास होता है. बताते नहीं हैं आप?

ऐसी कोई बात नहीं है.

जब बाहर निकलते हैं तो सभी का ध्यान अपने ऊपर जाता है. लेकिन जब आप जैसे युवा नेता क्षेत्र में निकलते हैं तो क्या वो भी शीशा देखते हैं कि कैसे लग रहे हैं?

निकलते समय तो नहीं लेकिन लौटकर ज़रूर देखते हैं कि क्या हाल हो गया है. जब 14-15 गाँवों के दौरे हो जाते हैं तो हम ज़रूर देखते हैं कि क्या हालत हो गई है. उसमें जो व्यक्तित्व निकलता है वो आप इसमें नहीं देख पाओगे.

अच्छा आपको ऐसा नहीं लगता कि आप पर महिलाएं अधिक ध्यान देती हैं?

इस बारे में क्या कहूँ.

क्या ये एक अच्छी फ़ीलिंग होती है?

बिल्कुल. जो मना करे वो झू बोल रहा होता है.

ऐसे समय में कैसे सामान्य रह लेते हैं?

बस अपनी दिनचर्या पर ध्यान देता हूँ.

जो युवा नेता हैं वो आदर्श के साथ-साथ फ़ैशन ट्रेंड भी स्थापित कर रहे हैं?

हम एक युवा देश में रह रहे हैं. यहाँ 70 फ़ीसदी लोग युवा हैं. किसी भी क्षेत्र का युवा हो उसके सामने एक एक आदर्श होना चाहिए. सचिन, सानिया, राहुल द्रविड़, नारायण कार्तिकेयन जैसे युवा आदर्श हैं अपने-अपने क्षेत्रों में. चाहे वो खेल, राजनीति और व्यापार कुछ भी हो. हर क्षेत्र में युवा आदर्श होना चाहिए.

आप पर भी एक युवा आदर्श होने का दबाव रहता है. आपको किस तरह रहना है, व्यवहार करना है?

मैं अपने आपको ऐसा नहीं मानता.

बहुत से लोग मानते हैं.

नहीं मेरा मानना है कि आपको अपना जीवन अपने सिद्धांतों पर जीना चाहिए. कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए.

आपकी पसंद का एक और गाना?

कैलाश खेर का गाया हुआ गाना है अल्लाह के बंदे...ये सूफ़ी और हिंदुस्तानी संगीत का अद्भुत मिश्रण है.

मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि आप बहुत अच्छा गाते भी हैं?

नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है. मेरे पिता जी और अम्मा की आवाज़ बहुत सुरीली है. बचपन में जब वो गाया करते थे और हमारे गाने की बारी आती थी तो वो हर बार एक-दूसरे से पूछा करते थे कि कि हमारी जिंस में कहाँ कमी रह गई जो इनकी आवाज़ इतनी ख़राब हो गई.

जब माधव राव जी गाते थे तो कौन सा गाना गाया करते थे. ख़ास तौर पर जब वो आपकी माँ के साथ गाया करते थे?

राजेश खन्ना का गाना ज़िंदगी का सफ़र....

और कोई गाना तो मुझे याद नहीं आ रहा. एक बार याद है मुझे याद है कि हम गोवा गए थे और किसी वार शिप पर सवार थे. शायद आईएनएस विक्रांत था. जहाज़ में बैंड भी था. तब पिता जी और अम्मा ने सभी अधिकारियों के लिए एक साथ गाना
गाया था.

फ़िल्मों में आपको कौन से अभिनेता और अभिनेत्री अच्छे लगते हैं?

अभिनेत्रियों में रेखा मुझे सदाबहार अभिनेत्री लगती हैं.

मिले हैं आप उनसे?

नहीं. आप मिला दीजिए.

मैं कोशिश कर सकता हूँ.

रेखा में भारतीयता, कला और प्रतिभा का अद्भुत मिश्रण है.

इनके अलावा शाहरुख़ खा़न पसंद हैं.

आज की अभिनेत्रियों में?

प्रियंका चोपड़ा.

हॉलीवुड में अगर मैं कहूँ तो एंजलीना जॉली.

ब्रैड पिट की जगह होना चाहेंगे आप?

बिल्कुल.

अगर मैं कहूँ कि सरल शब्दों में अपने आप को बयान कीजिए तो कैसे करेंगे.

प्रतिबद्ध, समर्पित और ख़ुशदिल इंसान.

 
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