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मनमोहन सरकार कमजोर एवं रिमोट संचालित |
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सांसदजी एंव लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के माध्यम से देश को परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाला देश बना दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' के ताजा अंक में संपादक तरुण विजय के साथ विशेष बातचीत में आडवाणी ने कहा कि यह ऐसी स्थिति है जिसे आज तक किसी भी कांग्रेसी या गैर कांग्रेसी सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। यह विडंबनापूर्ण है कि मनमोहन सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत की सबसे कमजोर सरकार साबित हो रही है। इसलिए अब इस सरकार के जाने का समय आ गया है।
परमाणु समझौते के परिपेक्ष्य में आडवाणी ने कहा कि अमेरिका के साथ हमारी नीति भी मित्रता की है। हम वामपंथियों की तरह अंध अमेरिका विरोध में विश्वास नहीं करते और चाहते हैं कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका एक अच्छे मित्र और आतंकवाद के विरोध में सहयोगी के नाते साथ खड़े दिखें, लेकिन यह मित्रता हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य के विकल्पों की कीमत पर नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि 1966 से आज तक भारतीय राजनीति में जनसंघ और भाजपा अकेले राजनीतिक दल रहे जिन्होंने भारत के परमाणु शक्ति संपन्न होने की माँग उ ाई। वर्ष 1998 में बाकी सभी दलों को राजी करते हुए वाजपेयी सरकार ने परमाणु विस्फोट किया। उस समय डॉ. सिंह ने पोकरण विस्फोट का तीव्र विरोध किया था।
आडवाणी ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार और हमारी सरकार ने देश को परमाणु शक्ति संपन्न किया और अमेरिका या किसी भी देश के प्रतिबंध की परवाह नहीं की।
आडवाणी ने कहा कि यह मनमोहन सरकार है, जो देश के हाथ बाँध रही है और मंजूर कर रही है कि भविष्य में हम कोई भी विस्फोट अमेरिकी सहमति के बिना नहीं करेंगे, लेकिन अगर किया तो उसकी गंभीर क्षति क्या होगी, यह नहीं बताया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से माँग की कि संविधान में इस प्रकार का संशोधन किया जाना चाहिए जिसमें सरकार द्वारा ऐसी हर किसी संधि को संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य बना दिया जाए। sourec:- webdunia. |