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वाजपेयी अब अपने मुड में आने कि तैयारी में |
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मनमोहन की सरकार को में घेरने के लिए राजग ने अपने शीर्षस्थ नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मैदान में उतारने की तैयारी की है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें सदन में अपनी सीट से बै कर बोलने की अनुमति दी है
लेकिन अभी भी उनके सदन में आने पर पशोपेश है। विपक्ष के साथ-साथ सरकार की निगाहें भी वाजपेयी के बयान पर टिकी हुई हैं। दिलचस्प तथ्य है कि परमाणु करार पर जहां राजग लगातार वाजपेयी से खुद सदन में मामला उ ाने का आग्रह कर रहा था, वहीं सरकार भी चाह रही थी कि पूर्व प्रधानमंत्री लोकसभा में इस मुद्दे पर बयान दें। राजग खास तौर से भाजपा नेता वाजपेयी को मैदान में दो कारणों से उतारना चाहते हैं। एक तो वाजपेयी के बयान को सरकार के लिए खारिज करना मुश्किल होगा और दूसरे पार्टी अन्य दलों में उनकी साख को भी भुनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि वाजपेयी अगर सदन में बोलते हैं तो न सिर्फ उसकी चर्चा ज्यादा होगी, बल्कि सभी दलों के लोग किसी भी अन्य नेता की तुलना में उनका कहा ज्यादा गंभीरता से लेंगे। दूसरी तरफ, सरकार के रणनीतिकार वाजपेयी के बयान से ही अपने बचाव की उम्मीद पाले हुए हैं। सरकार के एक वरिष् मंत्री का कहना था, 'वाजपेयी ने राष्ट्रहित को दलगत हितों से ऊपर रखा है। इतिहास गवाह है कि राष्ट्रहित से जुड़े मसलों पर उन्होंने दलीय राजनीति नहीं की। हमें उनसे समर्थन की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह जरूर है कि वह कोई न कोई रास्ता निकाल देंगे।' वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष जहां वाजपेयी के बयान से आस लगाए बै े हैं, वहीं अभी भी तय नहीं हो पा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री सदन में आ सकेंगे या नहीं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, अगर वह सदन में आए तो विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत वही करेंगे। भाजपा संसदीय दल के प्रवक्ता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सरकार लगातार जो भ्रम फैला रही है कि भाजपा अंदरखाने उनके साथ है, उसे हम वाजपेयी जी को उतारकर खत्म करना चाहते हैं। मगर अभी तय नहीं है कि वह सदन में आ सकेंगे या नहीं।'
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