मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि भारत-अमरीका परमाणु सौदे पर विरोध से पीछे नहीं हटा जा सकता और ग बंधन सरकार चलाना कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है.
यह पूछे जाने पर कि वाम दलों के विरोध का सरकार पर क्या असर पड़ेगा तो करात का कहना था ' ये तो आप कांग्रेस पार्टी से पूछिए कि वो सरकार चलाना चाहते हैं या नहीं. ' ऐसी ख़बर है कि सोमवार को परमाणु संधि पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संसद में बयान दे सकते हैं. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक अंग्रेज़ी अख़बार को दिए साक्षात्कार में कहा था कि अगर वाम दल समर्थन वापल लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं. तिरुअनंतपुरम में संवाददाताओं ने जब करात से इस संबंध में पूछा तो उनका कहना था, ' हम सब जानते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका के साथ परमाणु संधि के मुद्दे पर अत्यंत संवेदनशील हैं लेकिन यह मुद्दा संवेदनशीलता मात्र का नहीं है. यह गंभीर मुद्दा है. ' करात का कहना था कि यूपीए को यह तथ्य पता होना चाहिए कि सरकार वाम दलों के समर्थन से चल रही है और साझा कार्यक्रम में अमरीका के साथ सामरिक ग बंधन के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया था. उन्होंने कहा ' यह कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है कि वो ये देखे कि सरकार ऐसी कोई नीति न बनाए जो न्यूनतम साझा कार्यक्रम का विरोध करती हो. ' करात का कहना था कि संसद में परमाणु संधि पर किसी भी प्रकार की बहस यह दर्शा सकती है कि इस मुद्दे पर सरकार के पास बहुमत नहीं है. वामपंथी नेता ने पूर्व में कहा था कि अगर सरकार परमाणु संधि को लागू करती है तो उसे इसकी बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ेगी. इस बारे में पूछे जाने पर करात का कहना था कि सरकार को गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ेंगे. उधर ख़बर है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सोमवार को संसद में परमाणु संधि पर बयान दे सकते हैं. कुछ अख़बारों ने प्रधानमंत्री के सलाहकार संजय बारु के हवाले से कहा है कि प्रधानमंत्री लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर तथ्यपरक बयान दे सकते हैं और संभावना है कि कुछ वाम नेताओं से उनकी मुलाक़ात भी हो. Pic and News = BBC hindi |