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उपराष्ट्रपति चुनाव में सेना तटस्थ |
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शिवसेना के सांसद एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में तटस्थ रहने का संकेत दिया है। दोस्ती कि खातिर ?
उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं के साथ इस संबंध में उनकी कई बार बातचीत हुई लेकिन अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है और इसके दूर होने के तत्काल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जोशी ने शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ाकरे के हवाले से कहा कि दस अगस्त को होनेवाले उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में शिवसेना तटस्थ रहने का फैसला कर सकती है। भाजपा-शिवसेना के साथ ग बंधन को बरकरार रखने के उद्देश्य से जोशी ने यहां पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से बातचीत की है। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति चुनाव में संप्रग प्रत्याशी प्रतिभा पाटिल का मरा ी मानुस के नाते समर्थन और उनके पक्ष में मतदान करने के कारण भाजपा और शिवसेना के 21 वर्ष पुराने संबंधों में काफी खटास आई है और इसके चलते ग बंधन में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। भाजपा सूत्रों इसे शिवसेना के साथ संबंधों में दरार पड़ने की बात को स्वीकारते हैं और बात अब इस कदर बढ़ गई है कि महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा के नेता शिवसेना के साथ अपने संबंधों को समाप्त करने पर जोर दे रहे हैं। भाजपा नेता महासचिव गोपीनाथ मुंडे और प्रदेश अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शिवसेना के साथ रिश्तों को तोड़ देने की पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना को यहां केंद्रीय संसदीय बोर्ड के समक्ष व्यक्त की है। संभवत: इस पर 15 अगस्त तक कोई निर्णय किया जा सकता है।
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