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भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि एक दिन जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की बजाए सहयोग का प्रतीक बनेगा.
जम्मू की एक दिन की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मुश्किलों और 'आतंकवादियों के ब्लैकमेल' के बावजूद पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहेगी. रविवार को जम्मू विश्वविद्यालय में मनमोहन सिंह को डी.लिट की उपाधि दी गई. इस मौक़े पर अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे उम्मीद है और मैं भरोसा भी करता हूँ कि एक दिन जम्मू-कश्मीर दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रतीक बनेगा. सीमाएँ तो बदली नहीं जा सकतीं लेकिन वे अप्रासंगिक बनाई जा सकती हैं." 'रुकावटें' उन्होंने कहा कि विभाजन का तो सवाल ही नहीं उ ता लेकिन नियंत्रण रेखा को शांति रेखा बनाया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत में कुछ रुकावटें हैं.  |  मुझे उम्मीद है और मैं भरोसा भी करता हूँ कि एक दिन जम्मू-कश्मीर दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रतीक बनेगा. सीमाएँ तो बदली नहीं जा सकतीं लेकिन वे अप्रासंगिक बनाई जा सकती हैं  मनमोहन सिंह |
लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इन मुश्किलों के बावजूद पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहेगी. मनमोहन सिंह ने कहा, "मेरा मानना है कि शांति स्थापित करने के लिए बातचीत के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं. पाकिस्तान के साथ बातचीत का मक़सद पिछले 60 सालों से चले आ रहे कड़वे संबंधों को ख़त्म करना और आपसी सहयोग का नया अध्याय शुरू करना है." प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा ख़त्म करने की मांग की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वास्तविक राजनेता मतदान (बैलेट) से चुन कर आते हैं ना कि गोलियों(बुलेट) से. Soruce : BBC Hindi |