राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त प्रगतिशील ग बंधन (यूपीए) और वामपंथी दलों की साझा उम्मीदवार होंगी.
अगर वो राष्ट्रपति बनती हैं तो भारत में इस पद पर पहुँचने वाली पहली महिला होंगी. यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार शाम उनके नाम की घोषणा की. उम्मीदवार के चयन को लेकर बुधवार को शुरु हुआ मंथन गुरुवार को दिन भर जारी रहा. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम करुणानिधि ने वामपंथी दलों और यूपीए के बीच सहमति बनाने में मुख्य भूमिका निभाई. करुणानिधि और वाम दलों के बीच गुरुवार को दो दौर की बातचीत हुई. इसके बाद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ भी चर्चा की गई. समर्थन वामपंथी दलों ने शिवराज पाटिल और कर्ण सिंह की दावेदारी का विरोध किया जिसके बाद मार्गरेट अल्वा और प्रतिभा पाटिल का नाम सामने आया. हालाँकि सहमति प्रतिभा पाटिल के नाम पर बनी. महिला प्रत्याशी होने के कारण भी सहमति क़ायम करने में मदद मिली. 72 वर्षीया प्रतिभा पाटिल राज्य सभा की उपसभापति रह चुकी हैं. एक समय महाराष्ट्र में वो कांग्रेस पार्टी की मज़बूत नेता मानी जाती थीं. 1991 में अंतिम बार उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उसके बाद सक्रिय राजनीति में वो कम ही रहीं. निर्विवाद मानी जाने वालीं प्रतिभा पाटिल को लगभग तीन साल पहले राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया. |