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राज्यसभा सदस्य जया बच्चन को राहात |
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राज्यसभा उपचुनाव के लिए निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल शपथपत्र में अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा छुपाने के मामले में जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री व समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन को इस सिलसिले में बाराबंकी के जिलाधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट से कुछ राहत मिल सकती है।
इस मामले की जांच कर रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव आर पी पांडेय द्वारा इस मामले में हाल में बाराबंकी के जिलाधिकारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर हालांकि अभी फैसला लिया जाना बाकी है, लेकिन इस प्रारंभिक रिपोर्ट से बच्चन की राज्यसभा सदस्यता को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। पांडेय ने यहां बताया कि वह बाराबंकी के जिलाधिकारी की रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे और जया बच्चन की राज्यसभा की सदस्यता पर निर्णय जून माह के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट का जया बच्चन की राज्यसभा की सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला हाई कोर्ट तथा स्थानीय अदालत में विचाराधीन है और इस बारे में अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। इसके पूर्व मामले के जांच अधिकारी आर पी पांडेय ने बाराबंकी के जिलाधिकारी से जिले में बच्चन व उनके परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। चुनाव आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव राजेंद्र प्रसाद पांडेय को 2006 में हुए राज्यसभा चुनाव में दाखिल नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत शपथपत्र में अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा छुपाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर निर्णय देना है। निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2005 में जया बच्चन को उत्तर प्रदेश फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष के रूप में लाभ के पद पर होने की वजह से अयोग्य घोषित कर दिया था। 2006 में इस ओहदे को लाभ के पद से अलग कर दिए जाने के बाद बच्चन राज्यसभा उपचुनाव में फिर से राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। फैजाबाद के मंडलायुक्त तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट में मेगास्टार अमिताभ बच्चन और उनके परिजनों के पक्ष में बाराबंकी जिले में सरकारी भूखंडों का अवैध हस्तांतरण किए जाने को लेकर याचिका दाखिल की गई है। जया बच्चन ने वर्ष 2006 में हुए उपचुनाव के लिए आयोग के समक्ष दाखिल हलफनामे में अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा छुपाने के मामले में आयोग द्वारा जारी नोटिस का जवाब गत 16 अप्रैल को दाखिल कर दिया था। पांडेय ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने उनसे बच्चन के खिलाफ शिकायत तथा इस सिलसिले में भेजी गई नोटिस पर उनके जवाब के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने के लिए कहा है। निर्वाचन आयोग ने गत 30 मार्च को जया बच्चन को आखिरी मौका देते हुए एक नोटिस जारी करके 16 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के लिये कहा था। गत 16 अप्रैल को दाखिल अपने जवाब में सपा की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने कहा कि चुनाव के लिये नामांकन दाखिल करते वक्त संबंधित जमीन की खरीद प्रक्रिया चल रही थी और तहसीलदार कार्यालय में उसका पंजीयन नहीं हुआ था। गौरतलब है कि बाराबंकी जिले के एक अधिवक्ता अमीर हैदर ने गत 19 अक्टूबर 2006 को चुनाव आयोग के समक्ष पेश एक याचिका में कहा था कि बच्चन ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए शपथपत्र दाखिल करने के महज एक पखवाडे़ पहले अपने मेगास्टार पति अमिताभ बच्चन के नाम पर खरीदी गई दो संपत्तियों के बारे में जानकारी नहीं उपलब्ध कराई। हैदर ने बताया कि बच्चन द्वारा इस सिलसिले में दाखिल जवाब भ्रामक है और यह अपनी राज्यसभा बचाने का प्रयास मात्र है। गत मार्च 2006 में लाभ के पद मामले पर हुए विवाद के बाद राज्य सभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद बच्चन दूसरी बार मुश्किल में फंसी हैं। इस बार उन पर यह आरोप है कि गत वर्ष जून माह में राज्यसभा उपचुनाव मैदान में उतरते समय उन्होंने अपूर्ण शपथपत्र दाखिल किया और अपने पति अमिताभ बच्चन के नाम पर बाराबंकी जिले में खरीदी गई दो जमीनों का ब्यौरा नहीं दिया। हैदर ने आरोप लगाया था कि बच्चन ने अमिताभ के नाम पर मई 2006 में खरीदी गई दो जमीनों का विवरण नहीं दिया। इस तरह उन्होंने तथ्यों को छुपाया जो कानूनन दंडनीय है। जया बच्चन द्वारा एक जून 2006 को राज्यसभा उपचुनाव के लिए दाखिल किए गए शपथपत्र में अमिताभ के नाम पर दशमलव दो पांच हेक्टेयर के एक भूखंड को ही दर्शाया गया है, जबकि इसमें बाराबंकी की फतेहपुर तहसील के ग्राम दौलतपुर में अमिताभ के नाम पर खरीदी गई 1.3 हेक्टेयर तथा 1.5 हेक्टेयर के दो भूखंडों का उल्लेख नहीं है। हैदर का कहना है कि बच्चन के शपथपत्र में जिस भूखंड का जिक्र किया गया है वह भी विवादों में घिर गया है। इसे लेकर हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में दावा किया गया है कि यह ग्राम समाज की भूमि है और इसको गरीब तथा भूमिहीन किसानों का वितरित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फैजाबाद के मंडलायुक्त द्वारा इस मामले की सुनवाई 28 मई को की जानी है, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपी जुलाई माह में इसकी सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि लखनऊ खंडपी में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाराबंकी जिला प्रशासन ने बच्चन परिवार को ग्राम समाज की भूमि का आवंटन किया है। खुद को जिले का एक किसान बताने वाले याची सत्यनारायण शुक्ला ने आरोप लगाया कि मेगास्टार अमिताभ बच्चन को भूमि आवंटन करने में राज्य सरकार ने कानून और नियमों की अनदेखी की तथा उन्हें ग्राम समाज की परती भूमि आवंटित कर दी गई। याचिका में बाराबंकी के तत्कालीन जिलाधिकारी आर एस साहू के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन का नाम कथित रूप से हस्तांतरणीय भूमिधर के रूप में दर्ज किया गया।
Soure : Daink Jagarn |