केंद्रीय संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री दयानिधि मारन ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देने के बाद अपने को विवादों से परे किया , विगत दिनों तमिलनाडु में डीएमके ने अपने केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन को वापस बुलाने का फ़ैसला किया था
उनका कहना था कि पार्टी प्रमुख करुणानिधि को 'किसी ने' ग़लत सूचना दी और वह इस अवसर से लाभ उ ाना चाहता है. बार बार पूछने पर भी उन्होंने उस शख्स का नाम बताने से इनकार कर दिया. पत्रकारों से बातचीत में मारन ने कहा कि वो डीएमके नेता करुणानिधि से मिलेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे. उनका कहना था,'' मैं ऐसा शख्स नहीं हूँ जो पार्टी नेतृत्व को धोखा देने की सोचे. मैं डीएमके सदस्य के रूप में जन्मा और डीएमके सदस्य के रूप में ही मरूँगा. मुझे इस बात का दुख है कि मुझ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया.''  |  मैं ऐसा शख्स नहीं हूँ जो पार्टी नेतृत्व को धोखा देने की सोचे. मैं डीएमके सदस्य के रूप में जन्मा और डीएमके सदस्य के रूप में मरूँगा. मुझे इस बात का दुख है कि मुझ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया  दयानिधि मारन |
मारन का कहना था कि उन्हें मंत्रिपद छोड़ने से कोई दुख नहीं है. लेकिन जब मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी को इस बारे में जानकारी दी तो उन्हें थोड़ा धक्का ज़रूर लगा. उनका कहना था कि यदि पार्टी नेतृत्व उनसे कहेगा तो वो लोक सभा सदस्यता छोड़ने को भी तैयार हैं. मारन ने कहा कि उनका सन टीवी और दिनाकरन अख़बार से कोई ताल्लुक नहीं है. उल्लेखनीय है कि उनके बड़े भाई कलानिधि मारन इसके मालिक हैं. इस्तीफ़ा ग़ौरतलब है कि रविवार को दयानिधि मारन ने केंद्रीय संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.  | | | करुणानिधि के विधानसभा में 50 साल पूरे होने के समारोह में भी मारन नहीं पहुँचे थे |
इसके अलावा उन्हें पार्टी की ओर से एक कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी फ़ैसला किया गया था कि क्यों न उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया जाए. उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन नहीं किया और पार्टी को बदनाम किया. पिछले कुछ दिनों से करुणानिधि और मारन परिवार के बीच चले आ रहे तनाव के बाद यह फ़ैसला लिया गया है. तनाव की शुरुआत मारन परिवार के अख़बार दिनाकरन में प्रकाशित एक सर्वेक्षण के बाद हुई थी. डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री करुणानिधि के उत्तराधिकार को लेकर किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया था कि 70 प्रतिशत लोग करुणानिधि के छोटे बेटे स्तालिन को उनका उत्तराधिकारी मानते हैं और 30 प्रतिशत लोग बड़े बेटे अषगिरी को. इस सर्वेक्षण के प्रकाशित होने के बाद करुणानिधि के परिवार की अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक हो गई. इस सर्वेक्षण के प्रकाशन के बाद अख़बार के दफ़्तर पर हमला किया गया और तोड़फोड़ की गई. इस हिंसा में तीन लोगों की जान भी चली गई. soure : BBC -Hindi |