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'मुसलिमों के हक में काम करने से नहीं डरेंगे' |
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कांग्रेस तथा सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील ग बंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि मुसलमानों की स्थिति सुधारने के कदम अवश्य उ ाए जाएंगे और ऐसा करने में सरकार किसी से डरने वाली नहीं है।
सोनिया ने यहां एक संगोष् ी को संबोधित करते हुए कहा कि एक बात मैं बहुत साफ और पुरजोर ढंग से कहना चाहती हूं कि अक्लियतों की हालत सुधारने के मामले में हमें न कुछ छिपाना है और न किसी से डरना है। अगर हमारे समाज के कुछ लोग पिछड़ गए हैं तो उन्हें आगे बढ़ाना हमारा फर्ज है। उन्होंने कहा कि सरकार हर हाल में इस फर्ज को निभाएगी ताकि हम सभी भारतवासी कदम से कदम मिलाकर आगे बढे़ और कोई पीछे नहीं रह जाए। सोनिया गांधी दारुल उलूम के जाने-माने आलिम और पूर्व सांसद मौलाना असहद मदनी साहब की स्मृति में जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा आयोजित संगोष् ी को संबोधित कर रही थीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने मुसलिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा संबंधी स्थिति की जांच करने के लिए बनाई गई समिति की रिपोर्ट पर विचार किया है और सरकार बहुत जल्द ही इस संबंध में उचित कार्रवाई का एलान करेगी। सोनिया ने मौलाना मदनी द्वारा 1969 में संसद में दिए गए भाषण की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिक मसलों पर हमारे यहां बेहतरीन कानून हैं, लेकिन वे ीक से लागू नहीं किए जाते। कांग्रेस अध्यक्ष ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि हाल के वर्षो के अनुभवों से इस बात की सच्चाई जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि हम एक परिपक्व राष्ट्र है तथा अपनी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की हिम्मत हमारे पास है। हमें यह हिम्मत अपनानी होगी, क्योंकि कानून के सामने हर नागरिक समान है और सभी को जान-माल और सम्मान की रक्षा का एक-सा हक हासिल है। उन्होंने कहा कि विकास में भी हर नागरिक की हिस्सेदारी होनी चाहिए तथा अपना विकास करने के अवसर सभी को समान रूप से मिलने चाहिए। उन्होंने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की सराहना करते हुए कहा कि उसने मजहबी राष्ट्रीयता की सोच को खारिज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने मजहबी राष्ट्रीयता की बजाय ऐसी राष्ट्रीयता के विचार को अपनाया जिसमें जाति धर्म के भेदभाव के बिना हर हिंदुस्तानी को कंधे से कंधे मिलाकर आगे बढ़ने की सोच थी। उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर इसी भावना को अपनाने की जरूरत है। सभी नागरिकों को सच्ची समानता तथा जाहिर या छिपे दबे भेदभाव का पूरी तरह खात्मा इस भावना के दो प्रमुख आधार हैं। उन्होंने सही सोच वाले सभी राजनीतिक समूहों से इस भावना को अपनाने की अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मौलाना असहद मदनी का जीवन और उनके काम इस बात के सबूत हैं कि धार्मिक या मजहब परस्त होने का मतलब सांप्रदायिक होना नहीं है। परंपरा का सम्मान करने का मतलब कट्टरपंथी होना नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की चुनौतियों से मौलाना साहब जिंदगी भर जूझते रहे वैसी आज तक हमारे सामने बनी हुई है, जिनका पूरे जोशोखरोश से सामना करने की जरूरत है।
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