सोमवार को दोपहर 12 बजे के क़रीब कई वरिष् नेताओं और सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और लालजी टंडन गिरफ़्तारी देने के लिए हजरतगंज कोतवाली पहुँचे.
पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने से इनकार करते हुए कहा कि अभी इस मामले की विवेचना चल रही है और गिरफ़्तारी के लिए सबूत नहीं है इसलिए किसी को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता है. राजनाथ सिंह के साथ पूर्व पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, वेंकैया नायडु, यशवंत सिन्हा और कलराज मिश्र जैसे वरिष् नेता भी कोतवाली पहुँचे.  | | | राजनाथ सिंह ने आयोग के इस क़दम को पक्षपातपूर्ण बताया |
इस दौरान थाने के बाहर खड़े सैकड़ों कार्यकर्ता जय श्री राम और वंदेमातरम के नारे लगाते रहे. इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय दुकानदारों में डर पैदा हो गया था और कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए थे. राज्य प्रशासन की ओर से बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उससे निपटा जा सके. विरोध कोतवाली जाने से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष ने कहा, "चुनाव आयोग ने संवैधानिक मर्यादा से बाहर जाकर यह पक्षपात काम किया है. एक ही मामले में दो-दो एफ़आईआर कैसे दर्ज किए जा सकते हैं और इससे मेरा नाम कैसे जोड़ा गया जबकि मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता था." इस मसले पर बातचीत में लालजी टंडन ने कहा, "चुनाव आयोग नेताओं को नोटिस जारी करता रहा है. पहले सोनिया गांधी और मुलायम सिंह यादव को भी नोटिस जारी किया जा चुका है पर हमें न तो नोटिस दिया न जवाब मांगा और एफ़आईआर दर्ज करा दी गई." भाजपा ने अपने इस विरोध को दर्ज कराने के लिए नौ अप्रैल को जनाक्रोश दिवस घोषित किया है. |