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भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने ईरान के परमाणु मुद्दे के सैनिक समाधान का विरोध करते हुए कहा है कि यह मुद्दा बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए.
अपनी दो दिवसीय यात्रा पर तेहरान पहुंचे प्रणव मुखर्जी का कहना था कि ईरान को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विचारों और विशेषकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के रुख का ध्यान रखना चाहिए. मुखर्जी ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं. पूरे क्षेत्र में अमरीकी सैनिकों की बढ़ती संख्या से जुड़ी रिपोर्टों के बीच मुखर्जी ने कहा ' भारत ने हमेशा से कहा है कि ईरान के परमाणु मुद्दे का सैनिक समाधान नहीं हो सकता. बातचीत से ही समाधान निकाला जाना चाहिए. चाहे वो बातचीत कितनी ही कष्टप्रद क्यों न हो.' विदेश मंत्री ने कहा कि वो यही सलाह दे सकते हैं कि क्षेत्र में कम से कम तनाव बनाया जाए और जो तनाव है उसे बातचीत से कम किया जाए. प्रणव मुखर्जी बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेज़ाद और विदेश मंत्री मुनस्सर मोतक्की से वार्ताएं करेंगे. मुखर्जी का कहना था कि ईरान को किसी भी अन्य देश की तरह नागरिक उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार है लेकिन परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य होने के कारण उस पर कुछ शर्तें भी लागू होती हैं. दोनों पक्षों के बीच बातचीत में भारत ईरान से 22 अरब डॉलर द्रव प्राकृतिक गैस ( एलएनजी) संबंधी समझौते को लागू करने की अपील कर सकता है. इस समझौते के तहत ईरान ने भारत को प्रति वर्ष पांच मिलियन टन एलएनजी देने का वादा किया है. समझौते पर 2005 में ही हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन ईरान की संसद ने इसे अनुमोदित नहीं किया है. इस संबंध में मुखर्जी का कहना था कि वो इस बात पर ज़ोर देंगे कि समझौते को अंतिम रुप दिया जाए और ईरान अपने वादे को पूरा करे. समझौते के बाद ईरान ने एलएनजी की क़ीमतें बढ़ाने की मांग की थी जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है.मुखर्जी का कहना था कि एलएनजी समझौता अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किया गया है और ईरान अनुबंध के तहत इसे लागू करने के लिए बाध्य है. |