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सांसद ममता को सिंगूर मामले में वृंदा करात की नसिहत: |
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वरिष् माकपा नेता तथा पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने कहा है कि कांग्रेस व भाजपा नेता सिंगूर मामले में घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी का विरोध भी बेमानी है।
उन्होंने सिंगूर में कार फैक्ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले को विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के मुद्दे से पूरी तरह अलग करार दिया है। करात ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सिंगूर मामले में पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी की सरकार ने भूमि अधिग्रहण के मामले में एक मिसाल पेश की है। वहां न केवल भूमि मालिकों को बाजार दर से बेहतर कीमत दी गई है बल्कि इस पर बटाईदार के रूप में खेती करने वालों को भी 25 फीसदी राशि का भुगतान किया गया है। साथ ही सरकार खेतिहर मजदूरों को भी रोजगार मुहैया कराने के लिए योजना बना रही है। करात ने कहा कि सिंगूर मामले को सेज मामले से नहीं जोड़ा जा सकता। सेज मामले में श्रम कानून, भूमि की सीमा, विनिर्माण इकाइयों की सीमा, जमीन के प्रकार, किसानों के अधिकार जैसे मुद्दों की विसंगतियों को लेकर वामपंथी दल केंद्र सरकार से चर्चा कर रहे हैं और इनमें जरूरी बदलाव के लिए दबाव बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि माकपा का स्पष्ट तौर पर मानना है कि देश के सभी राज्यों में सेज के लिए एक जैसे मानदंड होने चाहिएं। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह तथा कांग्रेस नेता प्रियरंजन दास मुंशी इस मामले में घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, जबकि उनकी पार्टियां शुरू से ही किसान तथा मजदूर विरोधी रही हैं। जो भी सिंगूर मामले में विरोध कर रहे हैं वह राज्य में बेहतर निवेश को रोकना तथा रोजगार सृजन को बाधित करना चाहते हैं। इस मामले में ममता बनर्जी का विरोध भी उनकी समझ से परे है। एक प्रश्न के उत्तर में करात ने कहा कि केंद्र की संप्रग सरकार द्वारा भी पूववर्ती राजग सरकार की ही नीतियों का अनुसरण करने के चलते महंगाई बेतहाशा बढ़ी है। सरकार को अंतराष्ट्रीय कीमतों में कमी के मद्देनजर देश में भी पेट्रोल डीजल की कीमतों में कमी करनी चाहिए। कृषि संबंधी संसदीय समिति की अनुशंसा के अनुरूप वायदा कारोबार पर भी रोक लगाई जानी चाहिए तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को देश भर में मजबूत बनाया जाना चाहि। |