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न्याय की लड़ाई अगर गुनाह तो बार-बार करूंगा: योगी E-mail
adityanath yagiसत्ता के बूते हिंदुओं की भावनाओं को नही दबाया जा सकता। महानगर के बिगड़ते हालात के लिए प्रशासन दोषी है। दरअसल प्रशासन की अदूरदर्शिता, अकर्मण्यता व सत्ता के सामने चेरी की भूमिका ही मौजूदा हालात की वजह हैं। ये बातें गोरक्षपी उत्तराधिकारी व सदर सांसद योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जिला जेल मे एक विशेष बात-चीत के दौरान कही। उन्होने कहा कि मेरी लड़ाई न्याय व इंसाफ की है। अगर ये लड़ाई गुनाह है तो यह गुनाह मैं बार-बार करूंगा। उन्होने कहा कि मुझसे व अन्य जन प्रतिधियों के साथ प्रशासन ने जो पूर्वाग्रह व प्रतिशोध पूर्ण कार्रवाई की है उसे मैं संसद में मुद्दा बनाऊंगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले चार जनवरी से महानगर में वर्ग विशेष द्वारा की जा रही घटनाओं के प्रति प्रशासन का रवैया बेहद टालू था। दरअसल ये घटनाएं सत्ता पक्ष के संरक्षण में हो रही हैं। चूंकि प्रशासन के लोगों को अपनी कुर्सी प्यारी है। उसको बचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लिहाजा अपने आका को खुश करने के लिए गत घटनाओं में जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, उनके आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए।
   योगी जी ने सवाल उ ाया कि चार जनवरी को जिन लोगों ने बक्शीपुर व गोलघर के व्यापारियों के साथ बदसलूकी की। उनके दुकानों में तोड़फोड़ की थी। उनके विरुद्ध प्रशासन ने क्या किया? बाद में सम्मत की घटना को लेकर जो विवाद हुआ उसमें हिन्दुओं के सहयोग के बावजूद प्रशासन ने मामले को कार्रवाई के बजाय टाल ही दिया। इसके बाद कोतवाली थाना क्षेत्र में एक संभ्रात परिवार की महिला से दुस्साहसिक ढंग से छेड़खानी करने वालों के प्रति भी पुलिस का रवैया टालू ही रहा। इसी वजह से अराजक तत्वों का हौसला बुलंद हुआ और उन लोगों ने 26 जनवरी की रात राजकुमार अग्रहरि नामक एक व्यापारी पुत्र की हत्या के अलावा कई व्यापारियों के वाहनों को क्षतिग्रस्त करने के साथ उनको आग के हवाले कर दिया। कुछ मकानों में भी आगजनी की गयी। इतनी गंभीर घटना को भी प्रशासन पचा जाना चाहता था। खुद पुलिस के कुछ लोगों ने मौके से साक्ष्य मिटाए। इन लोगों ने क्षतिग्रस्त वाहनों को मौके से हटाने का भी प्रयास किया। व्यापारियों के विरोध के कारण ऐसा करने में वे विफल रहे। बाद में व्यापारियों के ही बुलावे पर ही मैं मौके पर गया। मेरी बस इतनी ही मांग थी कि चार जनवरी से अब तक जो घटनाएं घटी हैं, उनको प्रशासन गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। क्या यह मांग गुनाह है?
   अपनी गिरफ्तारी के बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे खुद इसकी वजह पता नही। मैं तय कार्यक्रम के अनुसार कुशीनगर में था। वहां से लौटकर गैर क‌र्फ्यू ग्रस्त इलाके में श्रद्धांजलि सभा करना था। सभा की घोषणा भी पूर्व में की गयी थी। अगर प्रशासन ने धारा 144 लगाया था तो इसकी सूचना वह सार्वजनिक करने के साथ मुझे भी दे सकता था। फिर अगर एक स्थानीय राज्यमंत्री को क‌र्फ्यूग्रस्त क्षेत्र में अपने लाव-लश्कर के साथ घूमने की खुलेआम छूट थी तो क्या हम लोग एक मृतक की श्रद्धांजलि सभा भी नहीं कर सकते थे? प्रशासन का यह दोहरा मानक नही चलने पाएगा।
 
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